
कावेरी नदी जल विवाद को लेकर कर्नाटक की राजनीति में इस वक्त सरगर्मी अपने चरम पर है। राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा बयान देते हुए कहा कि उनकी सरकार राज्य के किसानों और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कन्नड़ समर्थक संगठनों और किसान समूहों से आगामी 13 अगस्त को प्रस्तावित ‘कर्नाटक बंद’ के आह्वान को वापस लेने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकलता, खासकर तब जब राज्य में मानसून की मेहरबानी से पानी की स्थिति में सुधार देखा जा रहा है।
क्यों टली तमिलनाडु के सीएम सी जोसेफ विजय की बेंगलुरु यात्रा
कावेरी जल बंटवारे के पेचीदा मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार को दोनों पड़ोसी राज्यों के शीर्ष नेतृत्व की महत्वपूर्ण बैठक तय थी। हालांकि, डीके शिवकुमार ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय कर्नाटक सरकार के विशेष अनुरोध पर फिलहाल बेंगलुरु की अपनी यात्रा स्थगित करने के लिए पूरी तरह सहमत हो गए हैं। इस कदम को दोनों राज्यों के बीच तनाव कम करने और एक सौहार्दपूर्ण तथा बेहतर बातचीत का माहौल तैयार करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। इस हफ्ते की शुरुआत में अंतर-राज्यीय जल विवाद को लेकर पूरे राज्य में तीखे विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले थे, जिसके बाद यह कूटनीतिक कदम उठाया गया है।
सर्वदलीय बैठक में बनी आम सहमति और कानूनी पक्ष पर जोर
कावेरी मुद्दे पर बुलाई गई उच्चस्तरीय सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि बैठक में शामिल सभी विपक्षी दलों, पूर्व मुख्यमंत्रियों और कानूनी विशेषज्ञों ने सरकार के रुख का एक सुर में समर्थन किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह खुद कावेरी बेसिन क्षेत्र से आते हैं और एक किसान के बेटे हैं, इसलिए राज्य के साढ़े सात करोड़ नागरिकों को सरकार की निष्ठा पर कभी संदेह नहीं होना चाहिए। सरकार पूरी तरह से कानूनी दायरे में रहकर काम कर रही है और पीने के पानी की प्राथमिक जरूरतों को सबसे ऊपर रखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई और द्रमुक (DMK) के रुख पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक अपनी कानूनी टीम के साथ विचार-विमर्श करके बेहद सावधानी से हर कदम उठाएगा ताकि राज्य के हितों पर कोई आंच न आए।
मेकेदातु परियोजना और बांधों में पानी की स्थिति पर बड़ा खुलासा
मुख्यमंत्री ने मेकेदातु परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर पहले ही फैसला सुना चुका है, इसलिए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ना ही चाहिए। इस परियोजना के तहत कावेरी नदी पर एक जलाशय का निर्माण प्रस्तावित है, जिसका तमिलनाडु लगातार विरोध करता रहा है। मौजूदा जलभराव की स्थिति का जायजा देते हुए उन्होंने बताया कि काबिनी, केआरएस, हेमावती और हारंगी बांधों में कुल आवक लगभग 67,178 क्यूसेक तक पहुंच गई है। कर्नाटक को अपनी पेयजल आवश्यकताओं को सुरक्षित रखने के लिए कुल 40 टीएमसी पानी की जरूरत है, जिसमें से 36 टीएमसी अनिवार्य और 4 टीएमसी आपातकालीन स्थिति के लिए आरक्षित है। अंत में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार खुद लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है, इसलिए जनता और संगठन ‘कर्नाटक बंद’ के फैसले को वापस लें ताकि आम जनजीवन और व्यापार प्रभावित न हो।
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