
बीते सप्ताह शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली, जिसका सीधा असर देश की सबसे बड़ी वैल्यूएबल कंपनियों के बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप पर पड़ा। शेयर बाजार के सकारात्मक रुख के बीच देश की शीर्ष 10 में से 9 कंपनियों के कुल मार्केट कैप में सामूहिक रूप से 2,51,042.82 करोड़ रुपये (₹2.51 लाख करोड़) की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस शानदार तेजी के दौरान दिग्गज नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) बजाज फाइनेंस ने मार्केट कैप में सबसे ज्यादा कमाई करते हुए बाजी अपने नाम कर ली है।
बजाज फाइनेंस ने मारी बाजी, टाटा और रिलायंस का भी बढ़ा रुतबा
समीक्षाधीन सप्ताह में निवेशकों की लिवाली के चलते बाजार में बहार रही। टॉप 10 कंपनियों की सूची में शामिल 9 कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का मजबूत रुझान देखा गया, जिससे इनके मार्केट वैल्यूएशन में बड़ा उछाल आया। इस वित्तीय बढ़त में देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों और वित्तीय संस्थानों का बोलबाला रहा। बजाज फाइनेंस लिमिटेड ने इस हफ्ते सबसे अधिक निवेशकों को मालामाल किया और मार्केट कैप में सबसे आगे रही। इसके अलावा टाटा समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी दिग्गज कंपनियों को भी इस तेजी का भरपूर फायदा मिला, जिससे कुल सामूहिक पूंजीकरण में भारी इजाफा दर्ज किया गया।
सिर्फ इस एक दिग्गज कंपनी को हुआ घाटा
जहां एक तरफ देश की शीर्ष 9 कंपनियों के निवेशकों के चेहरे खिले रहे और उनकी संपत्ति में बंपर इजाफा हुआ, वहीं दूसरी ओर इस सुहानी चाल के बीच देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक को इस बार नुकसान का सामना करना पड़ा। टॉप 10 कंपनियों की इस खास सूची में केवल एक ही ऐसी बड़ी कंपनी रही जिसके मार्केट कैप में साप्ताहिक आधार पर गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, बाकी की सभी 9 कंपनियों ने अपने मजबूत प्रदर्शन के दम पर इस मामूली नुकसान के असर को बाजार में पूरी तरह बेअसर कर दिया और कुल मिलाकर बाजार का सेंट्रिफ्यूगल पॉजिटिव बना रहा।
शेयर बाजार की इस तेजी के मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों में सुधार और घरेलू निवेशकों के भरोसे के चलते बाजार में यह शानदार तेजी देखने को मिली है। बजाज फाइनेंस जैसी प्रमुख वित्तीय कंपनियों के शेयरों में आई लिवाली यह दर्शाती है कि देश के वित्तीय और कॉर्पोरेट सेक्टर की नींव मजबूत बनी हुई है। आने वाले दिनों में बाजार की यह चाल निवेशकों के लिए और भी बड़े अवसर लेकर आ सकती है, बशर्ते वैश्विक बाजार के आंकड़े और आर्थिक नीतियां ऐसे ही सकारात्मक बनी रहें।
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