
जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा परिदृश्य और मानवाधिकारों से जुड़ी एक बेहद भावुक और बड़ी कानूनी खबर सामने आ रही है। सालों पहले सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए पैलेट गन (Pellet Gun) के छर्रों के कारण अपनी दोनों आंखों की रोशनी पूरी तरह गंवा देने वाली इंशा मुश्ताक को आखिरकार एक लंबा कानूनी संघर्ष जीतने के बाद न्याय मिला है। कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रशासन ने इंशा को ₹41 लाख रुपये का वित्तीय मुआवजा सौंप दिया है। इस बड़ी कानूनी राहत के बाद अपना दर्द साझा करते हुए इंशा ने कहा कि पैसा चाहे जो भी हो, लेकिन पैलेट गन का वार इंसान की पूरी जिंदगी को हमेशा-हमेशा के लिए तबाह कर देता है।
खिड़की पर खड़ी 14 साल की बच्ची कैसे बन गई थी हिंसा की शिकार?
यह दर्दनाक वाकया साल 2016 का है, जब कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर अशांति और हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे। शोपियां जिले की रहने वाली इंशा मुश्ताक उस समय महज 14 वर्ष की एक मासूम छात्रा थी। एक दिन जब वह अपने घर की खिड़की खोलकर बाहर देख रही थी, तभी प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा चलाई गई पैलेट गन के सैकड़ों छर्रे सीधे उसके चेहरे और आंखों में जा धंसे। इस भयावह हादसे ने न केवल उसका चेहरा बिगाड़ दिया, बल्कि उसकी दोनों आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन ली।
मुश्किलों के आगे नहीं मानी हार, आंखों की रोशनी के बिना हासिल की बड़ी कामयाबी
अपनी जिंदगी में आए इस भीषण अंधेरे के बावजूद इंशा मुश्ताक ने कभी घुटने नहीं टेके। ब्रेल लिपि और विशेष शिक्षकों की मदद से उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उसकी अटूट इच्छाशक्ति का ही नतीजा था कि उसने आंखों की रोशनी न होने के बावजूद दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं न सिर्फ पास कीं, बल्कि अच्छे अंक हासिल कर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की। इंशा के इस जज्बे को देखकर देश-विदेश में उसकी जमकर तारीफ हुई थी और वह कश्मीर में संघर्ष और उम्मीद का एक बड़ा चेहरा बन गईं।
मुआवजा मिलने पर इंशा ने क्या कहा और क्या है इसके कानूनी मायने?
प्रशासन से मुआवजा राशि का चेक मिलने के बाद इंशा ने बेहद भावुक होकर कहा, “यह मुआवजा मेरे बीते हुए कल और मेरी आंखों की रोशनी को वापस नहीं ला सकता। पैलेट गन एक ऐसा हथियार है जो किसी भी हंसते-खेलते इंसान की जिंदगी को नरक बना देता है।” कानूनी और मानवाधिकार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस केस में मिला ₹41 लाख का मुआवजा एक नजीर बनेगा। यह फैसला रेखांकित करता है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को गैर-घातक हथियारों (Non-Lethal Weapons) का इस्तेमाल बेहद सावधानी और संयम से करना चाहिए ताकि बेगुनाह नागरिक इसका शिकार न बनें।
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