मुगलों ने भी शिवाजी महाराज को ‘चूहा’ कहा था! युवाओं को ‘कॉकरोच’ बताने पर क्यों आगबबूला हुए उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र की राजनीति में जुबानी जंग एक बार फिर बेहद दिलचस्प और आक्रामक मोड़ पर पहुंच गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आज की युवा पीढ़ी यानी ‘Gen Z’ को लेकर की गई एक विवादित टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया है। विरोधियों द्वारा युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टों) से किए जाने पर गहरी नाराजगी जताते हुए उद्धव ठाकरे ने इसे महाराष्ट्र की अस्मिता और युवाओं के अपमान से जोड़ दिया। उन्होंने इस बयान की तुलना सीधे मुगल काल से कर डाली, जिसने पूरे राज्य के सियासी गलियारे में हलचल मचा दी है।

छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास का दिया बड़ा हवाला

एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने इतिहास के पन्ने पलटकर विरोधियों को आईना दिखाने की कोशिश की। उन्होंने याद दिलाया कि जब छत्रपति शिवाजी महाराज मुगलों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध (गनिमी कावा) लड़ रहे थे, तब मुगलों ने भी उन्हें कम आंकते हुए ‘पहाड़ी चूहा’ कहा था। ठाकरे ने कहा कि इतिहास गवाह है कि उसी ‘चूहे’ ने मुगलों के विशाल साम्राज्य की जड़ें हिला दी थीं। ठीक उसी तरह, आज जो लोग देश और राज्य के भविष्य यानी युवाओं को कॉकरोच समझ रहे हैं, उन्हें यह युवा पीढ़ी अपनी ताकत का अहसास वक्त आने पर जरूर कराएगी।

आखिर क्यों छिड़ा युवाओं को लेकर यह नया सियासी घमासान

दरअसल, हाल ही में कुछ विपक्षी नेताओं या आलोचकों द्वारा आज के सोशल मीडिया और डिजिटल दौर के युवाओं (Gen Z) की क्षमता पर सवाल उठाते हुए उन्हें बेहद कमजोर और रीढ़विहीन (Fragile) बताने के लिए कथित तौर पर ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इस बयान को लपकते हुए उद्धव ठाकरे ने इसे सीधे मुंबई और महाराष्ट्र के युवाओं के स्वाभिमान से जोड़ दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए उद्धव ठाकरे का यह आक्रामक रुख युवा वोट बैंक को साधने और उन्हें अपनी विचारधारा से जोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

महाराष्ट्र की राजनीति और युवा वोटर्स पर इसका क्या होगा असर

महाराष्ट्र की धरती पर हमेशा से ही स्वाभिमान और इतिहास की प्रतीकात्मक राजनीति का बड़ा प्रभाव रहा है। मुंबई, पुणे, नागपुर और नाशिक जैसे बड़े एजुकेशन हब्स में रहने वाले Gen Z वोटर्स इस समय हर राजनीतिक दल के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। उद्धव ठाकरे द्वारा शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को युवाओं के साथ जोड़कर पेश किए जाने के बाद अब सत्ताधारी गठबंधन के लिए भी इस पर सफाई देना या पलटवार करना बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि युवाओं का यह वर्ग इस सियासी लड़ाई में किसका साथ देता है।