जंतर-मंतर पर बवाल: सीजेआई सूर्यकांत का सख्त रुख, बोले- ‘जिसने भी की ज्यादती, उस पर तुरंत हो एक्शन

देश की राजधानी के सबसे बड़े प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर हुई हालिया हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को दो टूक लहजे में हिदायत दी है कि इस हिंसा के दौरान जिसने भी अपनी सीमाओं को लांघा है और कानून के खिलाफ जाकर ज्यादती की है, उसके खिलाफ बिना किसी देरी के सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। शीर्ष अदालत के इस तीखे तेवर के बाद प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है।

कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं: सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

जंतर-मंतर पर हुए हिंसक घटनाक्रम की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों और सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी के बीच एक बारीक रेखा खींची। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में न तो हिंसा को जायज ठहराया जा सकता है और न ही प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के नाम पर सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल या बर्बरता का इस्तेमाल स्वीकार किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जो भी पक्ष नियमों का उल्लंघन करने का दोषी पाया जाएगा, उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

दिल्ली पुलिस को मिले सख्त निर्देश: निष्पक्ष जांच का बड़ा आदेश

अदालत ने इस पूरे मामले में एक विस्तृत और निष्पक्ष जांच रिपोर्ट तलब की है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे घटना के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और चश्मदीदों के बयानों की बारीकी से जांच करें। सीजेआई ने विशेष रूप से कहा कि इस जांच में किसी भी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव नहीं होना चाहिए। अगर कोई पुलिसकर्मी या सुरक्षा बल का जवान भी निर्दोष नागरिकों पर लाठीचार्ज या दुर्व्यवहार का दोषी पाया जाता है, तो उस पर विभागीय और कानूनी दोनों तरह की गाज गिरनी तय है।

क्या होगा इस आदेश का असर: जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था के नए नियम

सुप्रीम कोर्ट के इस बेहद सख्त आदेश के बाद अब दिल्ली के वीवीआईपी और प्रदर्शन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालत का यह रुख आने वाले दिनों में पुलिसिया कार्रवाई को और अधिक जवाबदेह बनाएगा। इस आदेश के बाद जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों को अत्यधिक सतर्क रहने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए बेहद संयमित रुख अपनाने की सलाह दी गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट के आदेश के बाद जांच एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं।