
डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन के बढ़ते प्रसार के साथ-साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी पहले से कहीं अधिक आधुनिक और खतरनाक हो चुके हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जनरेटिव एआई और डीपफेक (Deepfake) तकनीक का इस्तेमाल कर साइबर ठग अब सीधे बैंकों के डेटा सर्वर, यूजर क्रेडेंशियल्स और ऑथेंटिकेशन सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। एआई आधारित इन जटिल साइबर हमलों (AI Cyber Attacks) के गंभीर खतरे को देखते हुए देश के प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बैंकों ने एकजुट होकर सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। बैंकों ने दुनिया की 25 प्रमुख टेक और साइबर सिक्योरिटी कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। आइए एक टेक और साइबर सिक्योरिटी रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि यह सुरक्षा चक्र कैसे काम करेगा और इससे आम ग्राहकों को क्या फायदा होगा।
25 टेक दिग्गजों के साथ हाथ मिलाकर ‘एआई डिफेन्स नेटवर्क’ तैयार
बैंकिंग सुरक्षा को मजबूत करने के लिए देश के अग्रणी बैंकों (जैसे SBI, HDFC, ICICI, PNB आदि) ने माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, पालो आल्टो नेटवर्क, सिस्को जैसी 25 प्रमुख वैश्विक टेक और साइबर सुरक्षा प्रदाताओं के साथ हाथ मिलाया है।
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रियल-टाइम थ्रेट डिटेक्टिव सिस्टम: इस साझेदारी के तहत बैंक ऐसा AI-पावर्ड डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं जो साइबर अटैक होने से पहले ही सिस्टम में किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि (Anomaly Detection) को भांप लेगा।
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24/7 ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग: यह सिस्टम चौबीसों घंटे चालू रहेगा और लाखों फर्जी लेनदेन, संदिग्ध आईपी एड्रेस या मैलवेयर अटैक की पहचान कर उन्हें सेकंडों में ब्लॉक कर देगा।
बैंकिंग सेक्टर के सामने 3 सबसे बड़े AI खतरे
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डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग फ्रॉड: अपराधी एआई की मदद से ग्राहकों या बैंक के शीर्ष अधिकारियों की आवाज व चेहरे की क्लोनिंग करके फर्जी ऑथेंटिकेशन और भारी भरकम ट्रांजैक्शन करवाने की कोशिश कर रहे हैं।
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एडवांस्ड फ़िशिंग अटैक्स (AI Phishing): एआई द्वारा तैयार किए गए बेहद असली दिखने वाले ईमेल और मैसेज के जरिए बैंक ग्राहकों के पासवर्ड और ओटीपी (OTP) चुराए जा रहे हैं।
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सिस्टम लूपहोल हैकिंग: हैकर्स एआई एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर बैंकों की मुख्य बैंकिंग प्रणालियों (Core Banking Software) में छिपी सुरक्षा कमियों को तेजी से तलाश रहे हैं।
ग्राहकों की सुरक्षा और आरबीआई (RBI) के नए दिशा-निर्देश
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी सभी वित्तीय संस्थानों को एआई बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन मैकेनिज्म अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
25 दिग्गज कंपनियों के साथ हुए इस गठजोड़ का मुख्य लक्ष्य ‘मल्टी-फैक्टर बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन’ और ‘बिहेवियरल एनालिसिस’ को लागू करना है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई साइबर ठग आपका पासवर्ड या ओटीपी हासिल भी कर लेता है, तो एआई सिस्टम ग्राहक के सामान्य व्यवहार और लोकेशन से भिन्न गतिविधि देखते ही ट्रांजैक्शन रोक देगा। इससे आम ग्राहकों की मेहनत की कमाई डिजिटल फ्रॉड से पूरी तरह सुरक्षित रह सकेगी।
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