नया फ्लैट खरीदने से पहले चेक कर लें ये जरूरी दिशाएं: वास्तु दोष से बचने के लिए जानें एंट्री गेट से लेकर किचन तक के नियम

सपनों का आशियाना यानी नया फ्लैट खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का एक बहुत बड़ा फैसला होता है। लोग लोकेशन, बजट, बिल्डर की साख और एमिनिटीज तो ध्यान से जांचते हैं, लेकिन अक्सर ‘वास्तु शास्त्र’ (Vastu Shastra) के मूलभूत नियमों की अनदेखी कर देते हैं। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, गलत दिशा या वास्तु दोष वाले फ्लैट में रहने से परिवार में आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और बीमारियां पैर पसारने लगती हैं। वहीं, सही दिशा में बना फ्लैट घर में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। आइए एक रिपोर्टर की नजर से समझते हैं कि नया फ्लैट या अपार्टमेंट फाइनल करने से पहले आपको किन-किन मुख्य दिशाओं और वास्तु नियमों की जांच जरूर कर लेनी चाहिए।

1. मुख्य द्वार (Main Entrance): सुख-समृद्धि का प्रवेश द्वार

फ्लैट के मुख्य द्वार की दिशा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि वहीं से सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) घर में प्रवेश करती है।

  • सबसे शुभ दिशाएं: उत्तर (North), पूर्व (East) या उत्तर-पूर्व (Ishaan Kon) दिशा में मुख्य द्वार होना सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।

  • बचने योग्य दिशाएं: दक्षिण-पश्चिम (South-West) या केवल दक्षिण दिशा की तरफ खुलने वाले मुख्य द्वार वाले फ्लैट को लेने से बचना चाहिए, क्योंकि यह मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

2. रसोई घर (Kitchen) और बाथरूम का स्थान

रसोई घर में अग्नि तत्व का वास होता है, इसलिए इसकी सही दिशा सेहत और समृद्धि से सीधी जुड़ी है।

  • किचन की सही दिशा: रसोई घर हमेशा दक्षिण-पूर्व कोण यानी आग्नेय कोण (South-East) में होना चाहिए। यदि यह संभव न हो तो उत्तर-पश्चिम (North-West) दूसरा बेहतर विकल्प है।

  • बाथरूम और शौचालय: टॉयलेट या बाथरूम कभी भी उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में नहीं होना चाहिए। यह दिशा ईश्वर का स्थान मानी जाती है और यहां शौचालय होने से भारी वास्तु दोष लगता है।

3. मास्टर बेडरूम, बालकनी और ब्रह्मस्थान का गणित

  • मास्टर बेडरूम (Master Bedroom): घर के मुखिया का बेडरूम हमेशा दक्षिण-पश्चिम (South-West) दिशा में होना चाहिए। इससे निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और गृहस्थ जीवन में स्थिरता आती है।

  • बालकनी और खिड़कियां: फ्लैट में बालकनी या खुली खिड़कियां उत्तर या पूर्व दिशा में होनी चाहिए ताकि सुबह की प्राकृतिक धूप और ताजी हवा घर में आ सके।

  • सेंट्रल स्पेस (ब्रह्मस्थान): फ्लैट के बीचों-बीच का हिस्सा (Center Space) भारी निर्माण, पिलर या सीढ़ियों से मुक्त होना चाहिए। बीच का हिस्सा जितना खुला और हल्का रहेगा, घर में उतनी ही सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा।