
भारत में मध्यमवर्गीय और नौकरीपेशा परिवारों के बीच आमतौर पर यह धारणा बनी हुई है कि यदि उनकी सालाना आय 4 लाख रुपये से कम है या बेसिक छूट सीमा के दायरे में आती है, तो उन्हें आयकर रिटर्न (ITR Filing) दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो यह आपकी वित्तीय सेहत के लिए एक बहुत बड़ी और भारी भूल साबित हो सकती है। आयकर विभाग (Income Tax Department) के कड़े नियमों के मुताबिक, टैक्स स्लैब से कम कमाई होने के बावजूद देश के नागरिकों के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों में टैक्स रिटर्न दाखिल करना कानूनी रूप से पूरी तरह अनिवार्य (Mandatory ITR Filing) कर दिया गया है। इन महत्वपूर्ण नियमों की अनदेखी करने पर करदाताओं को न सिर्फ आयकर विभाग के लीगल नोटिस का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि उन पर भारी-भरकम जुर्माना और दंडात्मक कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
विदेश यात्रा और ₹1 लाख का बिजली बिल: इन खर्चों को करते ही रडार पर आ जाएंगे आप
इनकम टैक्स एक्ट के तहत सरकार ने खर्चों के आधार पर टैक्सपेयर्स की ट्रैकिंग प्रणाली को बेहद मजबूत कर दिया है। यदि आपकी सालाना कमाई ₹4 लाख से कम है, लेकिन आपने किसी एक वित्तीय वर्ष (Financial Year) में अपने या परिवार के किसी अन्य सदस्य के विदेशी दौरों या विदेश यात्रा पर कुल ₹2 लाख से अधिक की राशि खर्च की है, तो आपके लिए आईटीआर फाइल करना शत-प्रतिशत अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई घरेलू उपभोक्ता पूरे एक साल में अपने घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठान का कुल बिजली बिल ₹1 लाख या उससे अधिक का भुगतान करता है, तो वह सीधे टैक्स विभाग की निगरानी में आ जाता है। ऐसे सभी मामलों में कर योग्य आय (Taxable Income) बेसिक छूट सीमा से कम होने के बावजूद रिटर्न दाखिल करना ही होता है।
बैंक खातों में ₹50 लाख का कैश ट्रांजैक्शन: सेविंग्स और करंट अकाउंट धारक ध्यान दें
आयकर विभाग बैंकिंग चैनलों के जरिए होने वाले बड़े वित्तीय लेन-देन पर बहुत बारीक नजर रखता है। नए नियमों के अंतर्गत यदि किसी व्यक्ति ने एक वित्त वर्ष के दौरान अपने एक या एक से अधिक बचत खातों (Savings Account) में कुल मिलाकर ₹50 लाख या उससे अधिक की नकद या डिजिटल राशि जमा की है, तो उसे अनिवार्य रूप से आईटीआर दाखिल करना होगा। वहीं, चालू खातों (Current Account) के लिए यह सीमा और अधिक सख्त है; यदि आपके करंट अकाउंट में कुल जमा राशि ₹1 करोड़ को पार कर जाती है, तो रिटर्न दाखिल करने की विधिक बाध्यता लागू हो जाती है। यह नियम उन छोटे व्यापारियों और फ्रीलांसरों पर भी पूरी तरह लागू होता है जिनकी शुद्ध वार्षिक आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है।
विदेशी संपत्ति और पैरेंट कंपनी के ESOPs: ग्लोबल इनवेस्टमेंट करने वालों के लिए कड़े नियम
यदि आपकी घरेलू आय बेहद कम है, लेकिन आपके नाम पर भारत से बाहर यानी विदेश में कोई चल या अचल संपत्ति है, अथवा आप किसी विदेशी एसेट या ट्रस्ट के सीधे लाभार्थी (Beneficiary) हैं, तो आपके लिए भारतीय कर नियमों के तहत टैक्स फाइलिंग करना अनिवार्य है। आजकल आईटी कंपनियों और स्टार्टअप्स में काम करने वाले कई कर्मचारियों को विदेशी पैरेंट कंपनियों के एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन (ESOPs) के जरिए शेयर दिए जाते हैं। यदि आपके पास ऐसे विदेशी शेयर मौजूद हैं या किसी विदेशी बैंक खाते में आपके पास हस्ताक्षर करने का अधिकार (Signing Authority) सुरक्षित है, तो आपको अपनी जीरो लायबिलिटी के बावजूद अपने आईटीआर फॉर्म में इसका पूरा ब्यौरा देना होगा।
जीरो टैक्स और धारा 87A का भ्रम: समय पर रिटर्न न भरने पर लगेगा ₹5,000 का भारी जुर्माना
सैलरीड क्लास कर्मचारियों में एक और बड़ा भ्रम यह फैला हुआ है कि यदि उन्हें आयकर अधिनियम की धारा 87A (Section 87A) के तहत टैक्स रिबेट मिल रही है और उनकी शुद्ध टैक्स देनदारी शून्य (Zero Tax Liability) हो गई है, तो वे रिटर्न फाइल करने से मुक्त हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रिबेट मिलना एक अलग प्रक्रिया है, लेकिन यदि आप ऊपर दी गई अनिवार्य शर्तों में से किसी एक में भी फिट बैठते हैं, तो आपको डेडलाइन से पहले फॉर्म भरना ही होगा। यदि आप निर्धारित समय सीमा के भीतर आईटीआर दाखिल करने में विफल रहते हैं, तो आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत ₹5 लाख तक की आय पर ₹1,000 और उससे अधिक की आय पर ₹5,000 तक का लेट फाइलिंग जुर्माना (Late Fee Fine) ठोक दिया जाएगा, साथ ही बकाया टैक्स होने पर धारा 234A के तहत मासिक चक्रवृद्घि ब्याज भी चुकाना होगा।
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