
तमिल सिनेमा के महानायक से राजनीति के शीर्ष पटल पर पहुंचकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलझा वेत्री कड़गम’ (TVK) के भीतर एक बड़ा आंतरिक संकट खड़ा हो गया है। पार्टी ने सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अपनी एक वरिष्ठ महिला पदाधिकारी और पेशे से वकील एम. ज्ञानसौंदरी को प्राथमिक सदस्यता से पूरी तरह निष्कासित कर दिया है। यह बड़ी कार्रवाई तब की गई जब महिला नेता ने अपनी ही सरकार के मंत्रियों और पार्टी के शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार तथा रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे मद्रास हाई कोर्ट का रुख किया था। पार्टी ने शनिवार को आधिकारिक बयान जारी कर इस निष्कासन की पुष्टि करते हुए अपने सभी कार्यकर्ताओं को उक्त महिला नेता से दूरी बनाने की हिदायत दी है।
विपक्ष से मिलीभगत का आरोप: टीवीके नेता एन. मोहनराज ने प्रेस वार्ता में किया निष्कासन का बड़ा ऐलान
पार्टी के वरिष्ठ नेता एन. मोहनराज ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि एम. ज्ञानसौंदरी की प्राथमिक सदस्यता १७ जुलाई २०२६ को ही रद्द कर दी गई थी, जिसका औपचारिक ऐलान शनिवार को किया गया है। मोहनराज ने आरोप लगाया कि महिला पदाधिकारी ने राजनीतिक विरोधियों और विपक्षी दलों के साथ गुप्त सांठगांठ करके जानबूझकर पार्टी की स्वच्छ छवि को धूमिल करने की साजिश रची थी। टीवीके नेतृत्व ने इसे पार्टी विरोधी गतिविधियों का चरम रूप मानते हुए ज्ञानसौंदरी को संगठन के सभी सांगठनिक पदों से मुक्त कर दिया है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि कोई भी टीवीके सदस्य भविष्य में उनके साथ किसी भी प्रकार का राजनीतिक या व्यक्तिगत संपर्क स्थापित नहीं करेगा।
सरकारी वकीलों की भर्ती में धांधली का दावा: क्या है मद्रास हाई कोर्ट में दायर याचिका का पूरा सच
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए अहम भूमिका निभाने वाली वकील ज्ञानसौंदरी ने टीवीके के बड़े नेताओं पर सरकारी वकीलों (गवर्नमेंट प्लीडर्स) की नियुक्तियों में भारी हेरफेर और रिश्वत मांगने का सनसनीखेज आरोप लगाया था। उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर दावा किया था कि राज्य में वकीलों को अस्थायी नियुक्तियां देने के बदले में मोटी रकम की मांग की जा रही है। हालांकि, इस मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए टिप्पणी की कि याचिका में आरोपों को काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, और केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए कुछ मंत्रियों के नाम इस सूची में शामिल किए गए हैं।
भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को लगा झटका: मुख्यमंत्री थलपति विजय के सख्त स्टैंड के बीच आया नया संकट
पार्टी का यह अंदरूनी टकराव मुख्यमंत्री थलपति विजय के लिए एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में राज्यव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन नंबर जारी कर जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाने का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री विजय ने अपने कैबिनेट मंत्रियों को सख्त निर्देश दिए थे कि किसी भी स्तर पर घूसखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे समय में पार्टी के अपने ही कैडर द्वारा कोर्ट रूम में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाना टीवीके की नई नवेली सरकार की साख पर सवाल खड़े कर रहा था, यही वजह है कि पार्टी ने इसे विरोधियों का सुनियोजित दुष्प्रचार बताते हुए तुरंत निष्कासन का कड़ा कदम उठाया है।
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