
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती विस्तारवादी नीतियों और दादागिरी को माकूल जवाब देने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है। ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी में होने वाले बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘पिच ब्लैक 2026’ (Pitch Black 2026) में भारतीय वायुसेना के घातक राफेल फाइटर जेट्स अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। इस अभ्यास का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह क्षेत्र चीन के लिए रणनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है और यहां राफेल की दहाड़ ड्रैगन के लिए सीधा संदेश है।
100 लड़ाकू विमानों का महासंग्राम
पिच ब्लैक 2026 इस बार का सबसे बड़ा हवाई युद्धाभ्यास होने जा रहा है, जिसमें दुनिया भर से करीब 100 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय वायुसेना के राफेल विमान अपनी लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता और अत्याधुनिक रडार सिस्टम के साथ इस अभ्यास का मुख्य केंद्र होंगे। यह युद्धाभ्यास न केवल भारत की वायुशक्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देगा, बल्कि भारत-ऑस्ट्रेलिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भी प्रदर्शित करेगा।
चीन की दादागिरी पर लगाम
दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में चीन जिस तरह से अपनी नौसैनिक और हवाई उपस्थिति दर्ज करा रहा है, उस पर पिच ब्लैक 2026 के जरिए दुनिया के लोकतांत्रिक देश अपनी एकता दिखाएंगे। भारतीय वायुसेना की राफेल स्क्वाड्रन वहां पहुंचकर ऐसी जटिल हवाई युद्ध स्थितियों (Complex Air Combat Scenarios) का अभ्यास करेगी, जो किसी भी आकस्मिक सैन्य चुनौती से निपटने में सक्षम हैं। राफेल का वहां पहुंचना, चीन के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अब एकतरफा वर्चस्व नहीं चलेगा।
क्यों खास है पिच ब्लैक 2026?
पिच ब्लैक अभ्यास में विमानों के अलावा एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग, लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक और बड़े पैमाने पर हवाई अभियानों का संचालन किया जाता है। भारत के राफेल विमानों की मौजूदगी इस युद्धाभ्यास में एक नया आयाम जोड़ेगी। राफेल अपनी ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ (BVR) मिसाइल क्षमता और ‘मेटीयोर’ मिसाइल के दम पर किसी भी दुश्मन को हवाई सीमा में घुसने से पहले ही ढेर करने में सक्षम है। यह अभ्यास भारतीय वायुसेना के पायलटों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार युद्ध कौशल निखारने का अवसर देगा।
भारत की ‘शक्ति’ का वैश्विक प्रदर्शन
भारतीय वायुसेना की निरंतर भागीदारी यह साबित करती है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक वैश्विक सुरक्षा भागीदार है। पिच ब्लैक 2026 के माध्यम से भारत न केवल अपने सैन्य उपकरणों की प्रभावशीलता को परख रहा है, बल्कि मित्र देशों के साथ मिलकर एक सुरक्षित और ‘फ्री इंडो-पैसिफिक’ (Free Indo-Pacific) सुनिश्चित करने का संकल्प भी ले रहा है। राफेल की यह दहाड़ चीन की उन मंसूबों पर पानी फेरने के लिए काफी है, जो वह इस पूरे क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए बुन रहा है।
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