Bengal Politics: ममता बनर्जी को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका, राज्यसभा सांसद कोयल मलिक का आधिकारिक इस्तीफा

पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में मिली करारी और अप्रत्याशित हार के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है। पार्टी के भीतर मचे इस अभूतपूर्व आंतरिक घमासान के बीच, गुरुवार 16 जुलाई 2026 को ममता बनर्जी को एक और तगड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की नवनियुक्त राज्यसभा सांसद और मशहूर अभिनेत्री कोयल मलिक ने अपने पद से आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, कोयल मलिक ने करीब एक महीने पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे, लेकिन आज उन्होंने अपना त्यागपत्र औपचारिक रूप से भेजकर टीएमसी खेमे में खलबली मचा दी है।

महज चंद महीनों में कोयल मलिक का मोहभंग: अप्रैल में ही भेजी गई थीं संसद

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि ममता बनर्जी ने कोयल मलिक पर बड़ा भरोसा जताते हुए इसी साल अप्रैल 2026 के महीने में उन्हें राज्यसभा का प्रतिनिधित्व सौंपकर संसद भेजा था। लेकिन महज कुछ ही महीनों के भीतर उनका पार्टी से पूरी तरह मोहभंग हो गया। कोयल मलिक का यह कदम तृणमूल कांग्रेस के डूबते जहाज की कहानी बयां कर रहा है। कोयल से पहले सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर जैसे कद्दावर राज्यसभा सांसद भी पार्टी आलाकमान से तंग आकर इस्तीफा दे चुके हैं और दिलचस्प बात यह है कि ये सभी नेता बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामकर दोबारा राज्यसभा के उम्मीदवार बन गए। इस सिलसिले से यह साफ है कि ममता बनर्जी के सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार एक-एक कर उनका साथ छोड़ रहे हैं।

लोकसभा से विधानसभा तक ऐतिहासिक टूट: 20 सांसद और 60 से ज्यादा विधायक बागी

इस चुनावी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर जो बगावत शुरू हुई, उसने अब एक ऐतिहासिक विभाजन का रूप ले लिया है। पार्टी के अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधि अब ममता बनर्जी के नेतृत्व से दूरी बना चुके हैं। लोकसभा में स्थिति यह है कि 20 से अधिक सांसदों ने काकोली के नेतृत्व वाले धड़े के साथ मिलकर खुद को राष्ट्रीय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया है। वहीं, राज्य विधानसभा के भीतर भी ममता बनर्जी की जमीन पूरी तरह खिसक चुकी है, जहां 60 से अधिक विधायकों ने आधिकारिक तौर पर बागी रुख अख्तियार कर लिया है। नेता अपनी सहूलियत के हिसाब से या तो नया गुट बना रहे हैं या फिर दूसरे बड़े राजनीतिक दलों के साथ विलय की राह तलाश रहे हैं।

मदन मित्रा ने भी बदला पाला: ममता बनर्जी के सबसे करीबी ने थामा ऋतब्रत का हाथ

कोयल मलिक के इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले, बुधवार को ममता बनर्जी के बेहद वफादार और पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन मित्रा ने भी टीएमसी के आधिकारिक धड़े को तगड़ा झटका दे दिया। कामरहाटी से मौजूदा विधायक मदन मित्रा ने नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले शक्तिशाली बागी गुट से हाथ मिला लिया है। मित्रा ने मीडिया के सामने आकर घोषणा की कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के गरिमामयी पद को भी त्याग दिया है, जो ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक नुकसान है।

मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं: बागी तेवरों के साथ चारपाई को चुना

इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मदन मित्रा ने बेहद शायराना और राजनीतिक रूप से चतुर बयान दिया। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद कहा, “मैंने सिर्फ अपना कमरा बदला है, अपना मकान नहीं बदला। मैं तकनीकी रूप से आज भी तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हूं।” अपनी बात को आगे समझाते हुए उन्होंने कहा कि शायद ममता बनर्जी वाले कमरे में बेहद आरामदायक और आलीशान बिस्तर था, जबकि ऋतब्रत बनर्जी वाले बागी कमरे में सिर्फ एक साधारण चारपाई है, और उन्होंने जनता की आवाज के रूप में इस चारपाई को चुनना बेहतर समझा। मित्रा ने साफ कर दिया कि वह ममता गुट में कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं लेंगे, लेकिन वह सदन में विधायक बने रहेंगे। इस सिलसिलेवार बगावत ने ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।