आरोपी के मोबाइल से मिले 111 हूबहू असली सवाल! 5 लाख का सौदा टेलीग्राम पर 10 लाख में बिका, मची खलबली

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी (NEET UG) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। पेपर लीक मामले की जांच कर रही जांच एजेंसियों के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है। गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में परीक्षा के पूरे 111 असली सवाल बरामद हुए हैं। इसके साथ ही इस पूरे रैकेट के वित्तीय लेन-देन का भी पर्दाफाश हुआ है, जिसमें पांच लाख रुपये से शुरू हुआ यह खेल टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दोगुने दाम तक पहुंच गया।

मोबाइल में मौजूद थे परीक्षा के 111 हूबहू सवाल

जांच अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान पकड़े गए संदिग्ध के स्मार्टफोन के डेटा को जब खंगाला गया, तो उसमें एक गोपनीय पीडीएफ फाइल मिली। इस फाइल में नीट यूजी परीक्षा के कुल 111 सवाल बिल्कुल उसी क्रम और भाषा में मौजूद थे, जो परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र में पूछे गए थे। यह इस बात का अकाट्य सबूत है कि परीक्षा शुरू होने से कई घंटे पहले ही प्रश्नपत्र को पूरी तरह से लीक कर दिया गया था। साइबर और फॉरेंसिक टीमें अब इस मोबाइल के डिलीट किए गए डेटा और चैट हिस्ट्री को रिकवर करने में जुटी हैं ताकि इस चेन से जुड़े अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

5 लाख रुपये में हुआ सौदा, टेलीग्राम पर 10 लाख में खुली बोली

इस रैकेट के काम करने के तौर-तरीकों ने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि लीक करने वाले गिरोह ने सबसे पहले चुनिंदा दलालों और छात्रों के साथ इस पूरे पेपर का सौदा महज 5 लाख रुपये प्रति छात्र की दर से तय किया था। लेकिन लालच बढ़ने के बाद इस सिंडिकेट ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। गिरोह के सदस्यों ने टेलीग्राम (Telegram) पर सीक्रेट और एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स बनाए, जहां इस लीक प्रश्नपत्र को 10-10 लाख रुपये में धड़ल्ले से बेचा गया। डिजिटल पेमेंट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसों का ट्रांसफर किए जाने के भी इनपुट मिले हैं।

सॉल्वर गैंग और कोचिंग सेंटर्स के कनेक्शन की गहराई से जांच

इस बड़े खुलासे के बाद देश के कई राज्यों में फैले सॉल्वर गैंग और कुछ नामी कोचिंग संस्थानों के गठजोड़ पर भी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि परीक्षा केंद्र से या प्रिंटिंग प्रेस से यह पेपर किस स्तर पर बाहर आया। इस नई कूटनीतिक और डिजिटल जांच के बाद प्रभावित छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने और दोबारा निष्पक्ष तरीके से परीक्षा आयोजित कराने की मांग तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय भी इस पूरे मामले की रिपोर्ट पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।