
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो दल वर्षों तक हिंदू आस्था और धार्मिक प्रतीकों पर सवाल उठाते रहे, वही आज आस्था की राजनीति की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे पूरी तरह विरोधाभासी और हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय आस्था के केंद्र को किसी भी राजनीतिक विवाद में घसीटना या उसे बदनाम करने का प्रयास उचित नहीं है।
‘हिंदू आस्था पर सवाल उठाने वालों की बदलती भाषा’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन राजनीतिक दलों और नेताओं ने पहले हिंदू धार्मिक मान्यताओं पर लगातार सवाल खड़े किए, आज वही लोग आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर उसका जवाब भी देती है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और राम मंदिर जैसे विषय को राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से देखने के बजाय राष्ट्रीय आस्था के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
‘गिरफ्तारियां भी हुईं और नैतिक आधार पर इस्तीफे भी दिए गए’
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जिन मामलों में कार्रवाई की आवश्यकता थी, वहां कानून के अनुसार गिरफ्तारियां भी हुईं और नैतिक जिम्मेदारी तय होने पर इस्तीफे भी दिए गए। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और सरकार कानून व्यवस्था के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करती।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी एक घटना के आधार पर पूरे राम मंदिर या उससे जुड़े धार्मिक आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश करना गलत है। ऐसे प्रयास समाज में भ्रम फैलाने का काम करते हैं।
यूपी की बदली पहचान का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब नौ से सवा नौ वर्ष पहले प्रदेश पहचान के संकट से जूझ रहा था। सरकार बनने के बाद विकास, कानून व्यवस्था और निवेश जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया गया, जिससे उत्तर प्रदेश की नई पहचान बनी है।
उन्होंने दावा किया कि जो प्रदेश कभी पिछड़े राज्यों में गिना जाता था, आज वह देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। राज्य में आधारभूत ढांचे, औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
2027 चुनाव से पहले आयोगों और बोर्डों में बड़ी नियुक्तियों की तैयारी
मुख्यमंत्री सरकार 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न आयोगों, बोर्डों और निगमों में बड़े स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियों की तैयारी भी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अनुसूचित जाति आयोग, अल्पसंख्यक आयोग सहित कई प्रमुख संस्थाओं में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति जल्द की जा सकती है।
जानकारी के अनुसार, सरकार और भाजपा संगठन 80 से अधिक नामों पर सहमति बना चुके हैं। प्रदेश में आयोगों, बोर्डों और निगमों में 1000 से अधिक पद फिलहाल रिक्त बताए जा रहे हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से भरे जाने की तैयारी है।
राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में सरकार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए आयोगों और बोर्डों में नियुक्तियां संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर की जा सकती हैं। इससे सरकार विभिन्न वर्गों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की रणनीति पर भी काम कर रही है।
girls globe