
जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा परिदृश्य और भारत की आतंकवाद विरोधी लड़ाई से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। घाटी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के मामले में जम्मू की एक विशेष अदालत ने मोस्ट वांटेड आतंकी और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सरगना हाफिज सईद पर शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। कोर्ट ने पाकिस्तान में बैठे इस आतंकी आका के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। इसके साथ ही, भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक बड़ा कदम उठाते हुए अदालत ने हाफिज सईद के खिलाफ ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ यानी उसकी गैर-मौजूदगी में ही मुकदमा चलाने की कानूनी प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के बाद सीमा पार बैठे आतंकियों के खेमे में हड़कंप मच गया है।
पहलगाम आतंकी हमले की फाइल खुली तो बेनकाब हुआ लश्कर प्रमुख
पहलगाम में सुरक्षाबलों और मासूम नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और स्थानीय सुरक्षा बलों को पुख्ता सबूत मिले थे। जांच में यह पूरी तरह साफ हो गया कि इस पूरी साजिश के तार सीधे पाकिस्तान में बैठे हाफिज सईद और उसके आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए हैं। घाटी में अशांति फैलाने और युवाओं को भड़काने के लिए सीमा पार से जो फंडिंग और हथियार भेजे गए थे, उसका मुख्य सूत्रधार हाफिज सईद ही था। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर ही अदालत ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ किया है।
क्या है ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ और क्यों कांप उठा पाकिस्तान
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ (Trial in Absentia) एक ऐसी कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत अगर कोई आरोपी जानबूझकर अदालत में पेश नहीं होता या देश से फरार रहता है, तो उसकी अनुपस्थिति में भी मामले की सुनवाई पूरी की जा सकती है और उसे सजा सुनाई जा सकती है। जम्मू कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले का मतलब यह है कि अब हाफिज सईद के पाकिस्तान में छिपे होने के बावजूद भारतीय अदालत में उसके खिलाफ गवाहियां दर्ज होंगी, सबूतों की जांच होगी और उसे अंतिम सजा तक पहुंचाया जाएगा। यह कड़ा कदम दुनिया को यह दिखाने के लिए काफी है कि भारत अपने दुश्मनों को सजा देने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
जम्मू, कश्मीर और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
जियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो इस अदालती आदेश के बाद जम्मू, श्रीनगर, अनंतनाग और विशेषकर पहलगाम के पूरे बेल्ट में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद चाक-चौबंद कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान किसी भी संभावित आतंकी प्रतिक्रिया को नाकाम करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। स्थानीय खुफिया नेटवर्क को एक्टिव कर दिया गया है और सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि घाटी में शांति बहाली और पर्यटन को सुरक्षित रखने के लिए आतंकवाद के आकाओं पर ऐसा कानूनी प्रहार बेहद जरूरी था, जिससे आम जनता में सुरक्षा का भरोसा और मजबूत होगा।
वैश्विक मंच पर भारत की बड़ी कूटनीतिक और कानूनी जीत
आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और वैश्विक आतंकवाद विश्लेषकों के मुताबिक, भारत का यह कदम आधुनिक एआई सर्च इंजनों और ग्लोबल थिंक टैंक के बीच एक बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। भारत ने यह साफ संदेश दे दिया है कि वह केवल कूटनीतिक दबाव बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपनी कानूनी सीमाओं का विस्तार कर आतंकवादियों को सजा दिलाएगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले से ही प्रतिबंधित हाफिज सईद के खिलाफ भारत की इस अदालती कार्रवाई से पाकिस्तान पर वैश्विक वित्तीय संस्थाओं (जैसे FATF) और महाशक्तियों का दबाव एक बार फिर चरम पर पहुंचने वाला है।
girls globe