
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख रहे अजित पवार के इस साल जनवरी में हुए एक दुर्भाग्यपूर्ण हेलिकॉप्टर क्रैश में निधन के बाद पार्टी की कमान संभालने वाली उनकी पत्नी व वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर अब बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक संकट मंडराता नजर आ रहा है। अजित पवार के निधन के लगभग छह महीने बाद पार्टी के भीतर ही आंतरिक कलह सतह पर आ गई है। राकांपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में हुए निर्वाचन को कानूनी रूप से चुनौती दी है, जिससे महाराष्ट्र की सियासत में एक नया भूचाल आ गया है।
असंवैधानिक चुनाव और प्रक्रिया के उल्लंघन का दावा
दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित विधि फर्म एआरएस एसोसिएट्स के माध्यम से राकांपा के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह की ओर से नौ जुलाई को सुनेत्रा पवार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को एक औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस में दावा किया गया है कि बीते 26 फरवरी को हुआ अध्यक्ष पद का चुनाव पूरी तरह से असंवैधानिक था और इसे तत्काल प्रभाव से ‘अमान्य’ घोषित किया जाना चाहिए। आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया पार्टी के संविधान के अनिवार्य प्रावधानों को ताक पर रखकर, तथा बिना किसी विधिवत पूर्व सूचना या कार्यक्रम के जल्दबाजी में पूरी की गई थी।
बिना केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अधिवेशन बुलाने का आरोप
कानूनी नोटिस में विस्तार से यह भी आरोप लगाया गया है कि अजित पवार के निधन के तुरंत बाद पार्टी ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया था कि नए अध्यक्ष के चुनाव तक प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कामकाज संभालेंगे। इसके बावजूद, महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव द्वारा कथित तौर पर बिना किसी संवैधानिक अधिकार के राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया गया और चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। नोटिस के अनुसार, पार्टी के संविधान के मुताबिक न तो किसी केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन हुआ था और न ही किसी निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति की गई थी, जिससे प्रतिनिधियों को नामांकन या मतदान का उचित अवसर नहीं मिला।
चुनाव आयोग को भेजे पत्र वापस लेने की मांग और पार्टी का पलटवार
याचिकाकर्ता सच्चिदानंद सिंह ने निर्वाचन आयोग को इस वर्ष 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल को भेजे गए उन पत्रों को भी वापस लेने की मांग की है जिनमें नए पदाधिकारियों के विवरण दर्ज हैं। साथ ही एक स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि सच्चिदानंद सिंह खुद 26 फरवरी के राष्ट्रीय अधिवेशन में उपस्थित थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के समर्थन में मतदान किया था, तथा चुनाव में सभी नियमों का पूरी तरह पालन हुआ था।
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