75 साल पुराना वो जादुई गीत: रेडियो पर 24 घंटे गूंजता था मोहम्मद रफी का ये गाना, दीवाने हो गए थे लोग

हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग में जब सुरीले नग्मों और रूहानी आवाजों का जिक्र होता है, तो स्वर कोकिला जैसे मुकाम पर विराजमान लीजेंड्री सिंगर मोहम्मद रफी का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। 1940 के दशक से अपनी जादुई आवाज से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले रफी साहब ने कई ऐसे अमर गीत गाए हैं, जिन्होंने इतिहास रच दिया। उन्हीं में से एक ऐसा नायाब और पुराना गीत था, जो 1950 के दशक में देश के हर कोने में और अलग-अलग रेडियो स्टेशनों पर दिन-रात यानी 24 घंटे लगातार गूंजा करता था। इस गाने के दीवाने इस कदर हो गए थे कि हर तरफ बस इसी सुरीली धुन की चर्चा रहती थी।

जब खय्याम साहब भी हो गए थे रफी की आवाज के कायल

वर्ष 1950 के दशक में रिलीज हुई फिल्म ‘बीवी’ के इस खूबसूरत गाने को मशहूर संगीतकार खय्याम साहब ने संगीतबद्ध किया था। इस फिल्म का निर्देशन किशोर शर्मा ने किया था, जिसमें अल नासिर, मुमताज शांति और प्राण जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म का एक कालजयी गीत था ‘अकेले में वो घबराते तो होंगे, मिटाके मुझको पछताते तो होंगे’। संगीतकार खय्याम ने एक साक्षात्कार में खुद इस बात का जिक्र किया था कि रफी साहब की आवाज में रिकॉर्ड हुआ यह गाना पूरे देश की पसंद यानी ‘रीच ऑफ द नेशन’ बन गया था। हालत यह थी कि रेडियो के विभिन्न चैनलों और प्रसारण केंद्रों से दिनभर में किसी न किसी कोने से यही गीत बार-बार ब्रॉडकास्ट हो रहा होता था।

अमर संगीत और रफी साहब का स्वर्णिम सफर

मोहम्मद रफी की आवाज का जादू ऐसा था कि वह हर गीत में अपनी रूह और जज्बा डाल देते थे, जिससे वह गाना सीधे सुनने वाले के दिल में उतर जाता था। 1940 के दशक से लेकर 1970 के दशक तक के सफर में रफी साहब ने एक से बढ़कर एक नायाब गानों को अपनी आवाज दी, जिनमें ‘ये दुनिया ये महफिल’, ‘बहारों फूल बरसाओ’ और फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ का सदाबहार गीत ‘क्या हुआ तेरा वादा’ शामिल है, जिसके लिए उन्हें पहला नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। आज भले ही दशकों बीत चुके हैं, लेकिन रफी साहब की वह जादुई आवाज और 75 साल पुराना यह संगीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में उतनी ही शिद्दत से जिंदा है।