
रोज सुबह की शुरुआत के साथ ही आम आदमी के बजट को सीधे प्रभावित करने वाली पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी हो जाती हैं. देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियां (OMCs) हर दिन सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर के आधार पर ईंधन के नए रेट तय करती हैं. आज, सोमवार 13 जुलाई 2026 को भी उत्तर प्रदेश के तमाम प्रमुख शहरों के लिए पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जारी कर दिए गए हैं.
अगर आप आज गाड़ी में तेल भरवाने के लिए घर से बाहर निकलने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि आज लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी समेत यूपी के बड़े शहरों में प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल किस भाव पर मिल रहा है.
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम
यूपी के अलग-अलग जिलों में स्थानीय टैक्स (VAT) और माल ढुलाई के खर्च के कारण कीमतों में आंशिक अंतर देखने को मिलता है. आज के आधिकारिक रेट निम्नलिखित हैं:
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
| लखनऊ (Lucknow) | ₹101.86 | ₹95.36 |
| नोएडा (Noida) | ₹101.96 | ₹95.44 |
| प्रयागराज (Prayagraj) | ₹101.96 | ₹95.46 |
| वाराणसी (Varanasi) | ₹101.96 | ₹95.53 |
| गोरखपुर (Gorakhpur) | ₹102.13 | ₹95.62 |
| मेरठ (Meerut) | ₹101.99 | ₹95.46 |
| आगरा (Agra) | ₹101.66 | ₹95.14 |
| कानपुर शहरी (Kanpur) | ₹101.56 | ₹95.06 |
| अलीगढ़ (Aligarh) | ₹101.18 | ₹95.38 |
क्यों बढ़ रही हैं ईंधन की कीमतें? (Under Recovery & Global Market)
हालिया समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुए इजाफे के पीछे वैश्विक परिस्थितियां और तेल कंपनियों का वित्तीय घाटा मुख्य कारण हैं. 15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल के दामों में ₹3-₹3 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद से कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है.
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने इस बढ़ोतरी के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए बताया था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और ‘अंडर रिकवरी’ (लागत से कम कीमत पर तेल बेचना) के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना लगभग ₹1,000 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था. अनुमानों के मुताबिक, यह कुल अंडर रिकवरी लगभग ₹1.98 लाख करोड़ तक पहुंचने की आशंका है, जिसमें से केवल एक तिमाही का घाटा ही करीब ₹1 लाख करोड़ के आसपास है.
पेट्रोलियम मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) के दाम जो पहले 64-65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर थे, वे बढ़कर लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंच गए थे. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा प्रमुख देश रहा जिसने साल 2022 के बाद से एक लंबे समय तक वैश्विक संकट के बावजूद ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ने दी थीं, लेकिन वर्तमान बाजार की विसंगतियों को देखते हुए तेल कंपनियों को वित्तीय रूप से मजबूत रखने के लिए कीमतों में संशोधन करना अनिवार्य हो गया था.
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