भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य गाथा ‘देवदास’ के 24 साल: शाहरुख़, ऐश्वर्या और माधुरी की उस कल्ट क्लासिक फिल्म के 24 अनसुने और दिलचस्प फैक्ट्स

भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसी बहुत कम फिल्में बनी हैं, जिनका जादू दशकों बाद भी दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता है. मशहूर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली की मास्टरपीस फिल्म ‘देवदास’ (Devdas) आज अपने 24 साल पूरे करने जा रही है. 12 जुलाई 2002 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह भव्य फिल्म शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी उपन्यास पर आधारित थी. लेकिन भंसाली ने इसे सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि बड़े पर्दे पर एक ऐसा विजुअल ट्रीट बना दिया जिसने भारतीय सिनेमा में भव्यता और पीरियड ड्रामा फिल्मों की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया.

शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय बच्चन और माधुरी दीक्षित के शानदार अभिनय से सजी इस फिल्म की 24वीं वर्षगांठ पर आइए जानते हैं वे 24 दिलचस्प और अनकही बातें, जो ‘देवदास’ को आज भी एक मील का पत्थर बनाती हैं:

  • 1. संजय लीला भंसाली का विज़न: फिल्म का एक-एक फ्रेम भंसाली की कड़ी मेहनत और कलात्मक सोच को बयां करता है. उन्होंने हर सीन को किसी कैनवास पर उकेरी गई पेंटिंग की तरह बड़े पर्दे पर उतारा.

  • 2. शानदार साहित्यिक रूपांतरण: उपन्यास पर इससे पहले भी कई फिल्में बनी थीं, लेकिन भंसाली की देवदास ने कहानी के मूल दर्द, तड़प और उसकी आत्मा को अक्षुण्ण रखा.

  • 3. शाहरुख़ खान की ऐतिहासिक परफॉर्मेंस: देवदास के आत्मघाती प्रेम, उसके अहंकार, शराब के नशे और तड़प को किंग खान ने जिस गहराई से जिया, वह उनके करियर के सर्वश्रेष्ठ अभिनय में शुमार है.

  • 4. ऐश्वर्या राय की ‘पारो’: ऐश्वर्या की बेमिसाल खूबसूरती, सादगी और आंखों से भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता ने ‘पारो’ के किरदार को अमर बना दिया.

  • 5. माधुरी दीक्षित की ‘चंद्रमुखी’: एक तवायफ के किरदार में गरिमा, निस्वार्थ प्रेम और सम्मान को माधुरी ने इतने ऊंचे स्तर पर पेश किया कि आज भी लोग उनके अभिनय के कायल हैं.

  • 6. देव और पारो की अमर केमिस्ट्री: दीये की लौ से शुरू हुई देव और पारो की यह अधूरी प्रेम कहानी आज भी बॉलीवुड के इतिहास की सबसे रोमांटिक और दर्दनाक प्रेम कहानियों में शीर्ष पर गिनी जाती है.

  • 7. पारो और चंद्रमुखी का अनोखा रिश्ता: उस दौर के सिनेमा से इतर, भंसाली ने समाज की बंदिशों को तोड़ते हुए पारो और चंद्रमुखी के बीच ईर्ष्या के बजाय आपसी सम्मान और गहरी समझ का रिश्ता दिखाया.

  • 8. कांच का महल और आलीशान सेट्स: फिल्म के प्रोडक्शन डिजाइन पर पानी की तरह पैसा बहाया गया था. चंद्रमुखी का कोठा और पारो का ससुराल (कांच का महल) देखने के लिए लोग बार-बार सिनेमाघर जाते थे.

  • 9. कमाल की सिनेमैटोग्राफी: बिनोद प्रधान की जादुई लाइटिंग और कैमरावर्क ने हर एक सीन को जीवंत बना दिया, जिसके लिए फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.

  • 10. भारी-भरकम और रॉयल कॉस्ट्यूम्स: नीता लुल्ला और अबू जानी-संदीप खोसला द्वारा डिजाइन किए गए लहंगे और साड़ियां आज भी शादी-ब्याह के सीजन में फैशन डिजाइनर्स के लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत हैं.

  • 11. सदाबहार म्यूजिक एल्बम: इस्माइल दरबार के संगीत से सजा इस फिल्म का पूरा एल्बम शास्त्रीय और बॉलीवुड संगीत का एक बेजोड़ मिश्रण है.

  • 12. ‘डोला रे डोला’ और ‘मार डाला’ का जादू: ‘डोला रे डोला’ में ऐश्वर्या और माधुरी का जुगलबंदी डांस और ‘मार डाला’ में माधुरी के कत्थक के स्टेप्स आज भी पॉप कल्चर का अहम हिस्सा हैं.

  • 13. बेजोड़ कोरियोग्राफी: स्वर्गीय सरोज खान के हुनर ने फिल्म के हर डांस सीक्वेंस में कहानी के इमोशन और भव्यता को पिरो दिया था.

  • 14. दमदार और चुटीले डायलॉग्स: “बाबूजी ने कहा गांव छोड़ दो…” से लेकर “कौन कम्बख्त बर्दाश्त करने के लिए पीता है…” जैसे भारी-भरकम संवाद आज भी लोगों की जुबान पर रटे हुए हैं.

  • 15. भावनाओं का समंदर: फिल्म में अहंकार, प्रेम, तड़प, पारिवारिक मर्यादा और आत्म-त्याग जैसी इंसानी भावनाओं को बेहद बारीकी से पिरोया गया.

  • 16. पीरियड फिल्मों के लिए बेंचमार्क: ‘देवदास’ की सफलता के बाद ही बॉलीवुड में ऐतिहासिक और भारी-भरकम बजट वाली पीरियड फिल्मों को बनाने का हौसला बढ़ा.

  • 17. अपने दौर की सबसे महंगी फिल्म: करीब 50 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म उस समय की भारतीय सिनेमा की सबसे खर्चीली फिल्मों में से एक थी, जिसने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे.

  • 18. कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes) में प्रीमियर: साल 2002 में इस फिल्म का प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जहां अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने खड़े होकर फिल्म की सराहना की थी.

  • 19. ऑस्कर में भारत की एंट्री: ‘देवदास’ को एकेडमी अवॉर्ड्स (Oscars) में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म की श्रेणी के लिए भारत की तरफ से आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा गया था.

  • 20. वैश्विक मंच पर मिली पहचान: इस फिल्म ने दुनिया भर के सिनेमा प्रेमियों को भारतीय कला, नृत्य और पारंपरिक संस्कृति की भव्यता से रूबरू कराया.

  • 21. अवॉर्ड्स की रिकॉर्ड तोड़ बारिश: फिल्म ने रिकॉर्ड 5 नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स और 11 फिल्मफेयर पुरस्कार अपने नाम कर इतिहास रच दिया था.

  • 22. फैशन और पॉप कल्चर पर असर: फिल्म की रिलीज के बाद भारतीय बाजारों में ‘पारो साड़ी’ और पारंपरिक गहनों का एक नया ट्रेंड शुरू हो गया था जो सालों तक चला.

  • 23. फिल्ममेकिंग की चलती-फिरती पाठशाला: निर्देशन, स्क्रीनप्ले, लाइटिंग और साउंड डिजाइनिंग सीखने वाले छात्रों के लिए ‘देवदास’ आज भी एक केस स्टडी की तरह है.

  • 24. एक कालजयी विरासत: 24 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी, जब आज की युवा पीढ़ी इस फिल्म को देखती है, तो वह इसकी भव्यता और शाहरुख़ के अभिनय से चमत्कृत हो उठती है. यह साबित करता है कि क्लासिक सिनेमा कभी बूढ़ा नहीं होता.