
बिहार के ग्रामीण इलाकों और त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ी राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खबर सामने आ रही है। बिहार में आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग एक बहुत बड़ा तकनीकी बदलाव करने जा रहा है। इस बार गांव की सरकार चुनने के लिए मतदाताओं को न तो लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करना पड़ेगा और न ही नतीजों के लिए दिनों का सस्पेंस झेलना होगा। चुनाव आयोग इस बार ‘मल्टी पोस्ट ईवीएम’ (Multi-Post EVM) तकनीक का इस्तेमाल करने की पूरी योजना बना चुका है, जिससे वोटिंग से लेकर काउंटिंग तक की पूरी प्रक्रिया सुपरफास्ट मोड में आ जाएगी।
क्या है यह मल्टी पोस्ट EVM और कैसे बदलेगा वोटिंग का अंदाज?
आम तौर पर लोकसभा या विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल होने वाली सामान्य ईवीएम में मतदाता केवल एक पद (सांसद या विधायक) के लिए वोट डालता है। लेकिन बिहार पंचायत चुनाव में एक साथ कई पदों जैसे- मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए मतदान होता है। पुरानी व्यवस्था में बैलेट पेपर या अलग-अलग मशीनों के कारण काफी समय बर्बाद होता था। इसी समस्या को खत्म करने के लिए ‘मल्टी पोस्ट ईवीएम’ को लाया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक में एक ही कंट्रोल यूनिट से कई बैलेट यूनिट जुड़े होंगे। यानी वोटर जैसे ही बूथ के अंदर जाएगा, वह एक ही जगह खड़े होकर कुछ ही सेकंड्स के भीतर पंचायत के सभी अलग-अलग पदों के लिए अपना वोट दर्ज कर सकेगा।
दिनों का इंतजार खत्म: कुछ ही घंटों में साफ हो जाएगी जीत-हार की तस्वीर
चुनाव प्रबंधन और तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है: “मल्टी पोस्ट ईवीएम का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी फायदा मतगणना (Counting) के दिन देखने को मिलेगा। बैलेट पेपर से होने वाले चुनावों में मतपत्रों को छांटने, बंडल बनाने और उनकी गिनती करने में कई दिन लग जाते थे, जिससे गड़बड़ी की आशंका और तनाव बना रहता था। लेकिन इस डिजिटल मशीन के आने से जैसे ही काउंटिंग बटन दबेगा, चंद मिनटों में किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले, इसकी पूरी रिपोर्ट कंप्यूटर स्क्रीन पर आ जाएगी। इससे चुनावी हिंसा पर भी पूरी तरह लगाम लगेगी।”
इसके साथ ही, राज्य सरकार और पंचायती राज विभाग इस बार फर्जी मतदान को शत-प्रतिशत रोकने के लिए मतदान केंद्रों पर अत्याधुनिक फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (Chehra Pehchane Wali Takneek) का भी उपयोग करने पर विचार कर रहे हैं।
टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण बिहार के वोटर्स में भारी उत्साह
बिहार के विभिन्न जिलों जैसे पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, पूर्णिया और दरभंगा के ग्रामीण अंचलों (Geographical Impact) में इस नई व्यवस्था को लेकर अभी से ही चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे भावी मुखिया और जिला परिषद उम्मीदवारों का कहना है कि डिजिटल वोटिंग होने से चुनाव पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होगा। टियर-3 और ब्लॉक स्तर के मतदान केंद्रों पर कर्मियों को इस विशेष मल्टी-पोस्ट मशीन को ऑपरेट करने के लिए जल्द ही चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग दी जाएगी। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि बिहार का ग्रामीण लोकतंत्र अब पूरी तरह से हाईटेक और डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है।
girls globe