गिरते बाजार में भी इन म्यूचुअल फंड्स ने मचाया धमाल! लार्जकैप की रफ्तार पड़ी सुस्त, निवेशकों की चांदी

भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और गिरावट के जोखिम के बीच म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बेहद चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। आम तौर पर सुरक्षित माने जाने वाले लार्जकैप फंड्स (Large Cap Funds) इस बदलते दौर में सुस्त नजर आ रहे हैं। इसके विपरीत, बाजार के उतार-चढ़ाव को मात देते हुए मिडकैप (Mid Cap) और स्मॉलकैप (Small Cap) फंडों ने रिटर्न के मामले में बाजी मार ली है। इस प्रदर्शन ने रिटेल निवेशकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि मौजूदा समय में निवेश के लिए सबसे सही रणनीतिक विकल्प कौन सा है।

लार्जकैप फंड्स की सुस्ती के पीछे क्या है असली वजह?

बाजार के जानकारों का कहना है कि दिग्गज और बड़ी कंपनियों (Large Cap Companies) के शेयरों में हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सीधा असर देखने को मिला है। चूंकि लार्जकैप फंड्स का मुख्य निवेश इन्हीं फ्रंटलाइन कंपनियों में होता है, इसलिए बाजार की गिरावट के दौरान इनका प्रदर्शन काफी हद तक थमा हुआ या सुस्त नजर आ रहा है। बड़े फंड मैनेजरों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक दबाव और वैल्यूएशन के ऊंचे स्तर पर होने की वजह से बड़ी कंपनियां शॉर्ट-टर्म में उस गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, जिसकी उम्मीद निवेशक कर रहे थे।

मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों ने कैसे पलटी बाजी?

दूसरी तरफ, घरेलू सेक्टर्स में मजबूत डिमांड और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों (Local Economic Factors) के दम पर मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों ने शानदार रिकवरी दिखाई है। मिडकैप और स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स ने इसी तेजी का पूरा फायदा उठाया है। इन फंड्स ने न केवल गिरते बाजार के जोखिम को बेहतर तरीके से मैनेज किया, बल्कि आक्रामक ग्रोथ चाहने वाले निवेशकों को उम्मीद से कहीं बेहतर रिटर्न कमा कर दिया है। यही वजह है कि सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए इन कैटेगरीज में लगातार रिकॉर्ड निवेश आ रहा है।

बाजार विशेषज्ञों की राय: “गिरते बाजार में लार्जकैप फंड्स पोर्टफोलियो को स्थिरता जरूर देते हैं, लेकिन अगर आप अल्फा (Alpha) यानी बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो मौजूदा चक्र में मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं। हालांकि, निवेशकों को अपने जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) को ध्यान में रखकर ही एसेट एलोकेशन करना चाहिए।”

स्थानीय और खुदरा निवेशकों के लिए आगे क्या है रणनीति?

लोकल मार्केट सेंटिमेंट की बात करें तो भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाले नए और खुदरा निवेशक (Retail Investors) अब काफी समझदार हो चुके हैं। वे बाजार की हर गिरावट को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। फाइनेंशियल एडवाइजर्स की सलाह है कि बाजार के इस सुस्त दौर में निवेशकों को एकमुश्त (Lumpsum) बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। इसके बजाय, मिड और स्मॉलकैप फंड्स में अपनी एसआईपी को जारी रखना या गिरावट के समय स्मॉलकैप में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना एक स्मार्ट और फायदेमंद लॉन्ग-टर्म रणनीति साबित हो सकती है।