जब विकेट नहीं, बल्लेबाजों के हौसले उखाड़ते थे वसीम अकरम! ‘सुलतान ऑफ स्विंग’ की वो 3 खूनी गेंदें

क्रिकेट के इतिहास में अगर ‘खौफ’ और ‘हुनर’ का कोई एक नाम है, तो वह वसीम अकरम है। उन्हें यूं ही ‘सुलतान ऑफ स्विंग’ नहीं कहा जाता; जब उनकी गेंद हवा में लहराती थी, तो बड़े-बड़े दिग्गजों के पांव उखड़ जाते थे। वसीम अकरम सिर्फ एक गेंदबाज नहीं थे, बल्कि वह एक ऐसे जादूगर थे जो अपनी गेंदों से बल्लेबाजों के जहन में खौफ पैदा कर देते थे। आज भी दुनिया भर के क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स उनकी उन गेंदों को याद करते हैं जिन्होंने क्रिकेट की परिभाषा ही बदल दी। आइए, आज याद करते हैं वसीम अकरम की वो 3 ‘खूनी’ गेंदें, जिन्होंने क्रिकेट के मैदान पर आतंक मचा दिया था।

1992 वर्ल्ड कप फाइनल: जब गूँज उठी थी अकरम की दहाड़

1992 के वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ वसीम अकरम ने जो दो गेंदें फेंकीं, उन्हें क्रिकेट इतिहास की सबसे बेहतरीन गेंदों में गिना जाता है। पहले उन्होंने एलन लैंब को एक ऐसी इनस्विंगर डाली जिसे समझने में लैंब पूरी तरह नाकाम रहे और गेंद सीधे स्टंप्स से जा टकराई। उसके ठीक अगली गेंद पर उन्होंने क्रिस लुईस को क्लीन बोल्ड कर दिया। ये वो पल था जब पूरी दुनिया अकरम की स्विंग के आगे नतमस्तक हो गई थी। उन गेंदों में न केवल रफ्तार थी, बल्कि ऐसी सटीक कलाकारी थी जिसे आज के दौर के गेंदबाज भी सीखने की कोशिश करते हैं।

वेस्टइंडीज के खिलाफ वो ‘अनप्लेएबल’ यॉर्कर

वेस्टइंडीज की तेज और उछाल भरी पिचों पर बल्लेबाजों का सामना करना हमेशा मुश्किल होता है, लेकिन वसीम अकरम ने वहां अपनी रिवर्स स्विंग से कहर बरपाया था। जब अकरम पुरानी गेंद से गेंदबाजी करते थे, तो वह गेंद हवा में ही नहीं, बल्कि पिच पर गिरने के बाद भी अजीब तरीके से घूमती थी। उनकी एक ऐसी ही गेंद ने महान बल्लेबाज के भी होश उड़ा दिए थे, जहां गेंद बल्ले के नीचे से निकलकर लेग स्टंप उड़ा ले गई थी। उस वक्त अकरम के हाथ में गेंद का होना मतलब बल्लेबाज का खेल खत्म होना माना जाता था।

भारतीय पिचों पर अकरम का राज

भारतीय उपमहाद्वीप की सपाट पिचों पर जहां गेंदबाजों के लिए विकेट लेना संघर्ष भरा होता है, वहां भी अकरम ने अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया था। उन्होंने कई बार अपनी घातक यॉर्कर और कटर से भारतीय बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर किया है। उनकी गेंदबाजी की खासियत यह थी कि वह बल्लेबाज के पैर की स्थिति को पढ़कर गेंद की लाइन और लेंथ में पलक झपकते ही बदलाव कर लेते थे। उनकी वो खूनी गति और स्विंग का मिश्रण ही था जो उन्हें ‘सुलतान ऑफ टेरर’ बनाता था, और उनकी उन गेंदों का सामना करना किसी भी बल्लेबाज के लिए मौत के कुएं में उतरने जैसा होता था।