शराब निर्माताओं पर FSSAI का बड़ा हंटर: रम, व्हीस्की और बीयर में फ्लेवर व उम्र के भ्रामक दावों पर मिला सख्त नोटिस

हम सभी इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि शराब (Alcohol) का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है। लेकिन, यदि इस शराब में बिना अनुमति के केमिकल और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिला दिए जाएं, तो यह इंसानी शरीर के लिए और भी ज्यादा जानलेवा और खतरनाक हो जाती है। अब इसी गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए देश की शीर्ष खाद्य नियामक संस्था भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शराब निर्माताओं के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है।

प्राधिकरण ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए सार्वजनिक जानकारी दी है कि FSSAI ने कई शराब निर्माताओं को नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में कारण बताओ (Show-Cause) नोटिस जारी किए हैं। इन कंपनियों पर शराब में अनधिकृत फ्लेवर मिलाने और उत्पाद की उम्र (Ageing) से संबंधित भ्रामक व गलत दावे करने का कथित आरोप है। नियामक ने इन सभी कंपनियों से सख्त लहजे में स्पष्टीकरण मांगा है कि नियमों की अनदेखी करने के लिए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

किन नियमों के तहत नपा शराब उद्योग?

FSSAI द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और मानक (मादक पेय पदार्थ) विनियम, 2018 के तहत निर्धारित कड़े प्रावधानों का उल्लंघन करने के कारण की गई है। यह नोटिस FSS एक्ट, 2006 के तहत लाइसेंस प्राप्त उन सभी प्रमुख फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) और लिकर कंपनियों को भेजे गए हैं, जो भारत में मादक पेय पदार्थों के निर्माण और पैकेजिंग के काम में लगे हुए हैं।

जांच में पकड़ी गईं ये 3 बड़ी और गंभीर गड़बड़ियां

नियामक संस्था की जांच में शराब कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को गुमराह करने और मानकों से समझौता करने की तीन प्रमुख चालाकियां सामने आई हैं:

1. असली के नाम पर केमिकल: बिना अनुमति के फ्लेवर मिलाना (Added Flavours)

जांच में पाया गया कि कुछ कंपनियां अपनी ब्रांडेड रम (Rum), ब्रैंडी (Brandy), जिन (Gin), माल्ट/ग्रेन व्हीस्की (Malt/Grain Whisky), वाइन (Wine) और बीयर (Beer) में ऐसे कृत्रिम और बाहरी फ्लेवर्स मिला रही हैं, जो उत्पाद के प्राकृतिक स्वाद (Natural Taste) की नकल करते हैं।

नियम क्या कहता है: FSSAI के मानक स्पष्ट रूप से कहते हैं कि इन मादक पेय पदार्थों में केवल और केवल उनका असली, प्राकृतिक स्वाद और खुशबू (Authentic Taste & Aroma) ही होनी चाहिए। बाहरी रसायनों या फ्लेवर के जरिए स्वाद की नकल करना कानूनन अपराध है।

2. बोतल पर झूठी शान: उम्र संबंधी गलत दावे (Misleading Age Claims)

अक्सर प्रीमियम वाइन और व्हीस्की के शौकीन लोग बोतल पर लिखी उसकी उम्र (जैसे 12 साल पुरानी, 18 साल पुरानी) देखकर महंगी कीमत चुकाते हैं। लेकिन कुछ कंपनियां मादक पेय पदार्थ विनियम, 2018 के विनियम 1.3.7 का सख्ती से पालन किए बिना ही अपनी बोतलों पर उम्र दर्शाने वाले भारी-भरकम शब्दों, पर्यायवाची शब्दों या अप्रत्यक्ष (Indirect) संकेतों का उपयोग कर रही थीं। यह अनधिकृत दावे उपभोक्ताओं की जेब पर सीधे डाका डालने जैसे हैं।

3. ‘ब्लेड एज’ (Blend Age) की सच्चाई छुपाना

लिकर इंडस्ट्री में कई बार अलग-अलग सालों में बनी स्पिरिट्स को मिलाकर (Blend) एक अंतिम उत्पाद तैयार किया जाता है। नियम यह है कि यदि किसी उत्पाद पर ‘Aged’ (पुरानी) लिखा जा रहा है, तो निर्माता को स्पष्ट रूप से यह घोषित करना होगा कि बताई गई उम्र उस ब्लेंड में इस्तेमाल की गई सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट की है। कंपनियां इस सच्चाई को छुपाकर उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिला रही थीं कि पूरी शराब उतनी ही पुरानी है, जो कि सरासर भ्रामक है।

FSSAI का अल्टीमेटम: भुगतनी होगी कड़ी सजा

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने नोटिस पाने वाली सभी संबंधित कंपनियों को तत्काल प्रभाव से FSSAI के सभी नियामक नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर यह लिखित स्पष्टीकरण पेश करना होगा कि FSS अधिनियम, 2006 के तहत उनके खिलाफ लाइसेंस रद्द करने या भारी जुर्माना लगाने जैसी कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। सरकार के इस कदम से मिलावटखोर और भ्रामक विज्ञापन करने वाले शराब माफियाओं में हड़कंप मच गया है।