पुरी मंदिर प्रशासन और ISKCON आमने-सामने, गजपति महाराजा ने PM मोदी और राष्ट्रपति से लगाई गुहार

ओडिशा के पुरी में स्थित 12वीं सदी के ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर की सदियों पुरानी पवित्र धार्मिक परंपराओं को लेकर एक अभूतपूर्व और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा और स्नान यात्रा के आयोजन की तारीखों को लेकर ‘श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति’ (SJTMC) और ‘इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस’ (ISKCON) के बीच सीधा संग्राम छिड़ गया है। मंदिर प्रशासन का आरोप है कि इस्कॉन दुनिया भर के विभिन्न देशों और भारतीय शहरों में शास्त्रों व पंचांग के नियमों के विपरीत, ‘बे-मौके’ और असमय भगवान जगन्नाथ की रथ यात्राएं आयोजित कर रहा है, जिससे सनातन धर्म की मूल आत्मा और पुरी की सांस्कृतिक विरासत को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र: पुरी के राजा ने मांगी कूटनीतिक दखलअंदाजी

इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए पुरी के गजपति महाराजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, दिब्यसिंह देब ने देश के सर्वोच्च नेतृत्व का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक बेहद भावुक और कड़ा पत्र लिखकर इस धार्मिक मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।

गजपति महाराजा, जिन्हें धार्मिक रूप से महाप्रभु जगन्नाथ का पहला ‘सेवायत’ (प्रधान सेवक) माना जाता है, ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और कानूनी चैनलों का उपयोग करके विदेशों में इस्कॉन द्वारा मनमर्जी से निकाली जा रही इन बे-मौके रथ यात्राओं पर तुरंत रोक लगाए। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (पुरी) और ओडिशा सरकार ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए इस्कॉन के शीर्ष प्रबंधन के साथ कई बार लिखित संवाद और बैठकें की हैं, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर इस उल्लंघन को रोकने में कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।

‘क्या कोई अपना जन्मदिन बदल सकता है?’: गजपति महाराजा का तीखा सवाल

जब धार्मिक विद्वानों और मीडिया ने गजपति महाराजा से पूछा कि यदि भगवान जगन्नाथ के उत्सव दुनिया भर में अलग-अलग दिनों में मनाए जाते हैं, तो इसमें क्या खराबी है? इस पर पुरी के राजा ने एक बेहद तार्किक और तीखा जवाबी सवाल दागा। उन्होंने कहा, “शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाई जाने वाली ‘स्नान यात्रा’ वास्तव में महाप्रभु जगन्नाथ का प्राकट्य दिवस यानी जन्मदिन है। क्या दुनिया में कोई भी व्यक्ति अपना या किसी भगवान का वास्तविक जन्मदिन बदल सकता है? क्या कोई ईसाई समाज क्रिसमस की तारीख बदल सकता है या मुस्लिम समुदाय पैगंबर मोहम्मद की जयंती किसी और दिन मना सकता है? फिर भगवान जगन्नाथ के साथ यह खिलवाड़ क्यों?”

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि शास्त्रों के कड़े नियमों के मुताबिक, रथ यात्रा का भव्य उत्सव केवल ‘आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया’ से शुरू होने वाले नौ दिनों के पवित्र कालखंड के भीतर ही आयोजित किया जाना चाहिए। इस्कॉन भारत के मुख्य केंद्रों में तो इन तिथियों का पालन करता है, लेकिन विदेशों में अपनी सुविधा और वीकेंड (शनिवार-रविवार) के हिसाब से किसी भी महीने में रथ यात्रा निकाल देता है, जिसे सनातन परंपरा के अनुसार बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।

दिल्ली कूच करेगा उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल: मायापुर मुख्यालय से संपर्क साधने की तैयारी

जगन्नाथ संस्कृति और वैदिक शास्त्रों के शीर्ष शोधकर्ता प्रोफेसर हरेकृष्ण सत्पथी ने बताया कि इस विवाद को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) ने दिल्ली में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का बड़ा निर्णय लिया है। यह विशिष्ट प्रतिनिधिमंडल व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर जगन्नाथ संस्कृति की मौलिक शुद्धता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग करेगा।

गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने इस बात को स्वीकार किया कि केवल ओडिशा सरकार या पुरी का स्थानीय प्रशासन अकेले इस्कॉन जैसी वैश्विक संस्था को भारत के बाहर मनमर्जी करने से नहीं रोक सकता। इसके लिए उन्होंने ओडिशा के नवनियुक्त मुख्यमंत्री, कानून मंत्री, सांसदों और विधायकों के साथ भी एक साझा राजनीतिक और सांस्कृतिक मोर्चा तैयार किया है।

इसके साथ ही, गजपति महाराजा ने एक महत्वपूर्ण भौगोलिक और राजनीतिक बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि इस्कॉन का वैश्विक और अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय पश्चिम बंगाल के मायापुर में स्थित है, जहां से पूरी दुनिया के इस्कॉन केंद्रों के लिए गाइडलाइंस जारी की जाती हैं। अब बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में, चूंकि पश्चिम बंगाल में सरकार बदल चुकी है और इस्कॉन संगठन को भी एक नया प्रशासनिक प्रमुख मिला है, इसलिए पुरी का यह प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मायापुर का दौरा करेगा। उनका उद्देश्य इस्कॉन के नए नेतृत्व को सनातन धर्म के स्थापित नियमों और पुरी की पौराणिक परंपराओं का सम्मान करने के लिए राजी करना है, ताकि भविष्य में भगवान जगन्नाथ के पवित्र अनुष्ठान वैश्विक मंच पर उपहास का कारण न बनें।