पाला बदलते ही सायोनी घोष के बदले सुर: बारुईपुर कांड पर सीधे CM शुभेंदु के बचाव में उतरीं

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां पाला बदलते ही नेताओं की भाषा और राजनीतिक लाइन 180 डिग्री घूम जाती है। कभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखर चेहरा रहीं सायोनी घोष ने पाला बदलने के बाद अब बारुईपुर के संवेदनशील मामले पर बिल्कुल नया स्टैंड ले लिया है। सायोनी घोष अब इस पूरे घटनाक्रम में सीधे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बचाव में उतर आई हैं, जिसे लेकर पूरे सूबे के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और विपक्ष ने उनके पुराने बयानों को लेकर चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है।

बारुईपुर की घटना और सायोनी का नया राजनीतिक स्टैंड

दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में हुए इस विवादित कांड को लेकर जहां विपक्ष लगातार राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर प्रशासनिक नाकामी के आरोप लगा रहा है, वहीं सायोनी घोष ने सरकार का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में जांच बिल्कुल सही दिशा में आगे बढ़ रही है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सायोनी का यह बयान उस समय आया है जब बारुईपुर का मुद्दा स्थानीय स्तर पर बेहद गर्माया हुआ है और लोग कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए पुराने बयान: विपक्ष ने साधा निशाना

जैसे ही सायोनी घोष ने मुख्यमंत्री और सरकार के पक्ष में बयानबाजी शुरू की, विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके पुराने वीडियो और ट्वीट्स की बाढ़ ला दी। विपक्षी दलों ने याद दिलाया कि जब सायोनी दूसरे खेमे में थीं, तब वह इसी तरह की घटनाओं पर सीधे सरकार और मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा करती थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह पश्चिम बंगाल की अवसरवादी राजनीति का एक और बड़ा उदाहरण है, जहां विचारधाराएं और स्टैंड सिर्फ इस बात पर तय होते हैं कि नेता किस पार्टी के झंडे के नीचे खड़ा है।

बारुईपुर और दक्षिण 24 परगना में गरमाई जमीन: क्या होगा असर?

इस पूरे विवाद का असर बारुईपुर और उसके आसपास के भौगोलिक क्षेत्रों (Local Area) के समीकरणों पर भी पड़ने वाला है। सायोनी घोष का यह बदला हुआ रुख स्थानीय कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर असंतोष बढ़ सकता है। हुगली से लेकर दक्षिण 24 परगना तक इस बयान को लेकर राजनीतिक रैलियों में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। अब देखना यह होगा कि क्या सायोनी घोष का यह नया डैमेज कंट्रोल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और सरकार को इस संकट से बाहर निकाल पाता है या फिर उनके खुद के पुराने बयान उनकी नई राजनीतिक पारी के लिए मुसीबत बन जाएंगे।