प्रशांत किशोर की पार्टी के खिलाफ कौन होगा बीजेपी का ‘ट्रम्प कार्ड’? रेस में ये तीन बड़े नाम सबसे आगे

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस सीट पर चुनावी बिसात इसलिए भी दिलचस्प हो गई है क्योंकि चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज पार्टी’ इस उपचुनाव में पूरे दमखम के साथ उतर रही है। प्रशांत किशोर की इस नई और मजबूत चुनौती का सामना करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने सबसे जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में जुट गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के इस मजबूत गढ़ को बचाने के लिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में मंथन का दौर जारी है और टिकट की रेस में तीन कद्दावर नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।

प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ ने बढ़ाई पारंपरिक दलों की धड़कन

बांकीपुर सीट पारंपरिक रूप से बीजेपी और एनडीए का मजबूत किला मानी जाती रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं। प्रशांत किशोर जमीनी स्तर पर जाकर लगातार युवाओं, महिलाओं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर जनता के बीच पैठ बना रहे हैं। जन सुराज की इस आक्रामक चुनावी रणनीति ने बीजेपी के शीर्ष रणनीतिकारों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। बीजेपी अब किसी ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है जिसकी स्थानीय जनता के बीच गहरी पकड़ हो और जो जातिगत समीकरणों के साथ-साथ विकास के मुद्दे पर भी फिट बैठता हो।

टिकट की रेस में शामिल ये तीन बड़े नाम, किसका पलड़ा भारी?

बीजेपी के आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बांकीपुर उपचुनाव के लिए पार्टी के प्रदेश मुख्यालय से लेकर दिल्ली दरबार तक जिन तीन नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वे स्थानीय समीकरणों में बेहद फिट बैठते हैं। पहले दावेदार के रूप में क्षेत्र के एक अनुभवी और पुराने सांगठनिक नेता का नाम सामने आ रहा है, जिनकी कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ है। दूसरे नंबर पर एक युवा और सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय चेहरे को आगे किया जा रहा है, जो प्रशांत किशोर के युवा कार्ड की काट बन सके। वहीं, तीसरे नाम के रूप में एक ऐसे कद्दावर चेहरे की चर्चा है जो व्यापारिक और शहरी मतदाताओं के बीच बेहद लोकप्रिय है।

बांकीपुर का भौगोलिक और लोकल सियासी गणित

पटना जिले के अंतर्गत आने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट एक पूरी तरह से शहरी और जागरूक मतदाताओं वाली सीट है। यहां की बड़ी आबादी शिक्षित और व्यापार जगत से जुड़ी हुई है, जिसके कारण यहां राष्ट्रवाद, स्थानीय विकास, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दे हमेशा हावी रहते हैं। बीजेपी इस सीट को किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहती क्योंकि इसका सीधा असर सूबे की आगामी राजनीतिक दिशा पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि केंद्रीय चुनाव समिति इन तीनों नामों में से किस पर अपनी अंतिम मुहर लगाती है और बांकीपुर के इस महामुकाबले में कौन बाजी मारता है।