
पैगंबर मोहम्मद पर कथित विवादित टिप्पणी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मामले के आरोपी के खिलाफ तत्काल सख्त एक्शन और गिरफ्तारी की मांग को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों को कानून और जांच एजेंसियों की व्यवस्था पर विश्वास रखना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे सीधे शीर्ष अदालत आने के बजाय कानूनी प्रक्रियाओं और देश के सिस्टम पर भरोसा रखें।
याचिकाकर्ता की जल्द कार्रवाई की मांग पर अदालत की दो टूक
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आरोपी द्वारा की गई टिप्पणी से समाज का माहौल खराब हो सकता है, इसलिए इस मामले में तुरंत गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। इस पर पीठ ने असहमति जताते हुए कहा कि हर मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करना सही नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि देश में जांच और कार्रवाई के लिए एक स्थापित प्रशासनिक और कानूनी ढांचा मौजूद है, जिसे अपना काम करने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।
जांच एजेंसियों को अपना काम करने की आजादी जरूरी
सर्वोच्च न्यायालय ने रेखांकित किया कि किसी भी एफआईआर (FIR) या शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों को मामले की निष्पक्षता से जांच करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि कानून के सामने हर नागरिक बराबर है और न्याय प्रणाली बिना किसी दबाव के साक्ष्यों के आधार पर काम करती है। ऐसे में कानून को अपने तय तरीके से काम करने देना चाहिए, न कि कोर्ट की तरफ से किसी त्वरित एक्शन के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए।
कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने की दी नसीहत
इस हाई-प्रोफाइल मामले में सुनवाई को आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित उचित कानूनी मंच या स्थानीय अदालत का रुख करने की सलाह दी। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को कानूनी विशेषज्ञों द्वारा बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि देश की न्याय व्यवस्था और कानून का शासन (Rule of Law) भावनाओं या जल्दबाजी के बजाय पूरी तरह से स्थापित प्रक्रियाओं और संवैधानिक नियमों के तहत ही संचालित होगा।
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