ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की नई रैंकिंग जारी, एक पायदान नीचे खिसका भारत; जानें स्वीडन और सिंगापुर समेत दुनिया के टॉप 10 सबसे शक्तिशाली देशों की लिस्ट

ग्लोबल सिटिजन सॉल्यूशंस द्वारा जारी ‘ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026’ में भारतीय पासपोर्ट पिछले साल के मुकाबले एक स्थान नीचे गिरकर 125वें नंबर पर पहुंच गया है. कुल 197 देशों की इस वैश्विक सूची में भारत से एक पायदान ऊपर नामीबिया (124वें) और ठीक नीचे अजरबैजान (126वें) मौजूद है. हालांकि रैंकिंग में मामूली गिरावट आई है, लेकिन भारत का कुल स्कोर उछलकर 45.1 पर पहुंच गया है, जो पिछले पांच वर्षों में भारतीय पासपोर्ट का सबसे शानदार प्रदर्शन है.

सिर्फ वीजा-फ्री सफर नहीं, इन 3 बड़े पैमानों पर तय होती है पासपोर्ट की असली ताकत

आमतौर पर कई पासपोर्ट इंडेक्स सिर्फ इस आधार पर रैंकिंग तय करते हैं कि आप कितने देशों में बिना वीजा के घूम सकते हैं. लेकिन ‘ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स’ विश्व बैंक और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) समेत दुनिया की बड़ी संस्थाओं के 14 अलग-अलग मानकों को खंगालकर रिपोर्ट तैयार करता है. यह मुख्य रूप से तीन बड़े स्तंभों पर आधारित होता है:

  1. यात्रा की सुगमता (Mobility Index): दुनिया भर में आसानी से आने-जाने की आजादी.

  2. निवेश के अवसर (Investment Index): दूसरे देशों में बिजनेस और निवेश की अनुकूल नीतियां.

  3. जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life Index): रहने के लिहाज से सुख-सुविधाएं और स्वतंत्रता.

टॉप 10 में यूरोपीय देशों का एकछत्र राज, स्वीडन बना दुनिया का नंबर-1 पासपोर्ट

साल 2026 की इस नई रिपोर्ट में यूरोपीय देशों का दबदबा पूरी तरह साफ नजर आ रहा है. दुनिया के टॉप 10 सबसे ताकतवर पासपोर्ट में से 9 पर सिर्फ यूरोप का कब्जा है. इस लिस्ट में स्वीडन पहले पायदान पर काबिज होकर दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बन गया है. इसके बाद क्रमश: स्विट्जरलैंड, फिनलैंड और जर्मनी का नंबर आता है. पांचवें स्थान पर नीदरलैंड और डेनमार्क संयुक्त रूप से मौजूद हैं. इसके बाद आयरलैंड, यूनाइटेड किंगडम (UK) और नॉर्वे का स्थान है.

सिंगापुर बना एकमात्र गैर-यूरोपीय महाशक्ति, भारतीयों को अभी भी करना होगा लंबा इंतजार

हैरानी की बात यह है कि इस महासूची के टॉप 10 देशों में सिंगापुर इकलौता ऐसा देश है जो यूरोप से बाहर का है. रिपोर्ट के अनुसार, जिन नागरिकों के पास इन शीर्ष देशों का पासपोर्ट है, उन्हें किसी भी देश में व्यापार करने, नौकरी के बेहतरीन अवसर तलाशने और जरूरत पड़ने पर वहां आसानी से बसने में कोई कानूनी अड़चन नहीं आती. दूसरी तरफ, 125वें स्थान पर होने के कारण भारतीय पासपोर्ट धारकों को आज भी अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों की यात्रा के लिए कठिन कागजी कार्रवाई, भारी खर्च और लंबी वीजा प्रक्रियाओं के लंबे इंतजार से गुजरना पड़ता है.