
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की पेशकश के बाद से ही संतों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। संत मंडल ने एक स्वर में मांग की है कि ट्रस्ट किसी भी स्थिति में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न करे। संतों का तर्क है कि चंपत राय ने न केवल स्वयं SIT (विशेष जांच दल) से निष्पक्ष जांच की मांग की है, बल्कि उन्होंने पूरी पारदर्शिता के साथ इस मामले को सार्वजनिक किया है।
संतों का विश्वास और चंपत राय की भूमिका
संत मंडल का मानना है कि चंपत राय की छवि हमेशा से बेदाग रही है। संतों का कहना है कि उन्होंने खुद जांच की मांग की है, जो उनकी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का प्रमाण है। संत समाज के अनुसार, ऐसे समय में जब राम मंदिर निर्माण का कार्य अपने महत्वपूर्ण चरण में है, चंपत राय का पद पर बने रहना आवश्यक है। ट्रस्ट को किसी भी प्रकार के दबाव में आकर निर्णय नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
SIT जांच और पारदर्शिता पर जोर
संत मंडल के प्रमुख पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चंपत राय ने जो कदम उठाए हैं, वे स्वागत योग्य हैं। जब कोई व्यक्ति स्वयं जांच के लिए आगे आता है, तो इस्तीफे की बात का कोई औचित्य नहीं रह जाता। संतों ने ट्रस्ट से अपील की है कि वे चंपत राय का इस्तीफा खारिज करें और मामले की सच्चाई सामने आने तक उन्हें पूरी तरह से अपना समर्थन दें। उनका कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी कर देगा।
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