
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन आज जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंचना किसी के लिए भी सपना हो सकता है, लेकिन इस सफलता के पीछे उनका सालों का कड़ा संघर्ष और अनुशासन छिपा है। हाल ही में बिग बी ने अपने शुरुआती करियर के उन दिनों को याद किया जब वे एक साथ 10-15 फिल्मों में काम करते थे। उन्होंने बताया कि उस दौर में उनके मन में हमेशा एक डर बना रहता था कि कहीं यह काम हाथ से निकल न जाए और भविष्य में उन्हें काम मिलना बंद न हो जाए। इसी असुरक्षा की भावना ने उन्हें इतनी मेहनत करने पर मजबूर किया कि वे कभी रुकना नहीं जानते थे। अपनी बात रखते हुए उन्होंने मौजूदा पीढ़ी के अभिनेताओं के काम करने के तरीके पर भी एक बड़ी टिप्पणी की है।
असुरक्षा का डर और सफलता की सीढ़ी
अमिताभ बच्चन के अनुसार, उनके समय में काम की तलाश बेहद मुश्किल थी और हर फिल्म एक नए अवसर जैसी होती थी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का हमेशा डर सताता था कि अगर उन्होंने आज लापरवाही बरती, तो शायद कल उन्हें कोई काम न मिले। यही कारण था कि वे अपनी एनर्जी को बचाने के बजाय काम में झोंक देते थे, भले ही इसके लिए उन्हें अपनी निजी जिंदगी और सेहत के साथ समझौता क्यों न करना पड़ा हो। उन्होंने साझा किया कि एक समय ऐसा था जब उनके पास फिल्मों की इतनी लंबी कतार थी कि उन्हें दिन-रात काम करना पड़ता था। वह दौर उन्हें आज भी एक ऐसी सीख देता है कि करियर की शुरुआत में कभी भी ‘आराम’ को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए।
आज के एक्टर्स और काम का नया नजरिया
मौजूदा दौर के एक्टर्स के काम करने के तरीके पर टिप्पणी करते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा कि आज की पीढ़ी बहुत अधिक ‘प्लान्ड’ (योजनाबद्ध) है, जो अच्छी बात है लेकिन कभी-कभी वे काम की उस व्यापकता को खो देते हैं जो सालों के अनुभव से आती है। उन्होंने संकेत दिया कि आज के कलाकार फिल्मों के चयन में बहुत अधिक सतर्क हैं और वे हर काम को एक प्रोजेक्ट की तरह देखते हैं। बिग बी ने सलाह दी कि अभिनेता को हमेशा एक छात्र की तरह सीखना चाहिए और किसी भी भूमिका को छोटा नहीं समझना चाहिए। उनका यह अनुभव न केवल नए कलाकारों के लिए एक सबक है, बल्कि यह भी बताता है कि सिनेमा जगत में टिके रहने के लिए ‘काम के प्रति जुनून’ और ‘असुरक्षा का डर’ दोनों का सही संतुलन होना बेहद जरूरी है।
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