
उम्र सिर्फ एक नंबर है और सीखने की कोई सीमा नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है 75 साल के मिल्खी राम ने। आज की युवा पीढ़ी जहां पढ़ाई के नाम पर अक्सर थक जाती है, वहीं मिल्खी राम का जुनून किसी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। उन्होंने अब तक एक-दो नहीं, बल्कि कुल 32 डिग्रियां हासिल की हैं, जिनमें पीएचडी जैसी उच्च शिक्षा भी शामिल है। लेकिन उनका सफर यहीं खत्म नहीं हुआ। शिक्षा के प्रति अपनी अटूट भूख को शांत करने के लिए उन्होंने फिर से कलम उठाई है और इस बार वे इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) से ‘आचार्य’ (मास्टर डिग्री) की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो हर मंजिल छोटी पड़ जाती है।
डिग्रियों का शतक लगाने की तैयारी
मिल्खी राम का नाम अब शैक्षणिक जगत में एक मिसाल बन चुका है। इतनी डिग्रियां लेने के बाद भी उनका उत्साह किसी नए छात्र से कम नहीं है। उनके करीबियों का कहना है कि वे हमेशा नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने में यकीन रखते हैं। मिल्खी राम की माने तो शिक्षा केवल करियर बनाने का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व को निखारने का एक निरंतर चलने वाला सफर है। इग्नू में उनके सहपाठी और शिक्षक भी उनके समर्पण को देखकर हैरान रह जाते हैं। एक बुजुर्ग व्यक्ति को लाइब्रेरी और कक्षाओं में मेहनत करते देख हर कोई उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता। उनका अगला लक्ष्य क्या है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि वे अभी रुकने वाले नहीं हैं।
युवाओं के लिए एक जीता-जागता उदाहरण
आज के दौर में जब छात्र बहुत जल्दी तनाव और हताशा का शिकार हो जाते हैं, मिल्खी राम का जीवन हमें सिखाता है कि सीखने का जुनून ही आपको उम्र के हर पड़ाव पर जवान बनाए रख सकता है। उन्होंने समाज के उस रूढ़िवादी ढांचे को तोड़ा है, जिसमें माना जाता था कि रिटायरमेंट के बाद जीवन का एक ही पड़ाव शेष रहता है। मिल्खी राम न केवल खुद पढ़ रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य बुजुर्गों को भी शिक्षा से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका यह जज्बा न केवल शैक्षिक उपलब्धियों का उदाहरण है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच का भी एक बड़ा प्रमाण है। उनकी यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि सपनों को पूरा करने की कोई समय सीमा नहीं होती।
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