
पब्लिक सेक्टर के दिग्गज बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने वेस्ट एशिया के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घोटालों में से एक ‘एनएमसी हेल्थ’ (NMC Health) मामले में चल रहे सालों पुराने विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला किया है. बैंक ने इस जटिल कानूनी लड़ाई को अदालत के बाहर (Out of Court Settlement) सुलझाने के लिए जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स को 600 मिलियन डॉलर (करीब 5,700 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम भुगतान करने पर सहमति जताई है. इस ऐतिहासिक सेटलमेंट के बाद अबू धाबी, ब्रिटेन और भारत समेत कई देशों में चल रही फ्रॉड व इन्सॉल्वेंसी की कार्यवाही अब पूरी तरह बंद हो जाएगी. हालांकि, इस समझौते की सबसे खास बात यह रही कि दोनों में से किसी भी पक्ष ने अदालत के सामने अपनी किसी भी तरह की गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है.
क्या है 5-6 अरब डॉलर का NMC हेल्थ घोटाला, जिसने हिला दिया था बैंकिंग सेक्टर?
यह पूरा मामला एनआरआई (NRI) बिजनेसमैन डॉ. बीआर शेट्टी द्वारा प्रमोटेड हेल्थकेयर ग्रुप ‘एनएमसी हेल्थ’ से जुड़ा है, जो साल 2020 में अचानक ताश के पत्तों की तरह धराशायी हो गया था. एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि कंपनी के प्रबंधन ने कर्जदाताओं की आंखों में धूल झोंककर करीब 5 से 6 अरब डॉलर (लगभग 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये) का भारी कर्ज बही-खातों से पूरी तरह छिपाकर रखा था.
इस बड़े वित्तीय फ्रॉड के सामने आने के बाद वैश्विक बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मच गया और कई देशों की जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं. चूंकि बैंक ऑफ बड़ौदा इस ग्रुप को यूएई (UAE) और भारत में लोन देने वाले सबसे प्रमुख बैंकों में से एक था, इसलिए इस कानूनी पचड़े में बैंक का नाम भी घसीटा गया था.
बैंक ऑफ बड़ौदा पर क्या थे आरोप और कहां जाएगा सेटलमेंट का पैसा?
एनएमसी हेल्थ के दिवालिया होने के बाद कंपनी का कामकाज संभाल रहे जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स का आरोप था कि बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ की गई कुछ वित्तीय व्यवस्थाओं और क्रेडिट सुविधाओं के कारण ही एनएमसी को अपना डूबता हुआ कर्ज छिपाने में मदद मिली थी. एडमिनिस्ट्रेटर्स का दावा था कि इसी वजह से कंपनी पूरी तरह खोखली होने के बावजूद लंबे समय तक बाजार में बनी रही और लेनदारों को भारी नुकसान हुआ.
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पैसे का इस्तेमाल: समझौते के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा दिए जाने वाले ₹5,700 करोड़ एनएमसी की उस संपत्ति (एस्टेट) में ट्रांसफर किए जाएंगे, जिसे कोर्ट द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर्स देख रहे हैं.
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किसे मिलेगा फायदा: इस विशाल फंड का उपयोग उन वैश्विक बैंकों, बॉन्डहोल्डर्स और कमर्शियल क्रेडिटर्स का बकाया पैसा चुकाने के लिए किया जाएगा, जिनका अरबों रुपया एनएमसी हेल्थ के डूबने की वजह से अधर में लटक गया था.
बिजनेस पर नहीं पड़ेगा कोई बुरा असर, Q1 में जमा और लोन में बंपर उछाल
भले ही बैंक ऑफ बड़ौदा को एकमुश्त ₹5,700 करोड़ की भारी रकम चुकानी पड़ रही है, लेकिन बैंक के मुख्य बैंकिंग बिजनेस और बैलेंस शीट की सेहत पर इसका कोई खास नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. बैंक ने अपनी ताजा वित्तीय रिपोर्ट में साफ किया है कि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) में उसके कोर बिजनेस ने शानदार प्रदर्शन किया है:
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घरेलू जमा (Domestic Deposits): सालाना आधार पर 14.7 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ 14.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है.
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घरेलू लोन (Domestic Advances): क्रेडिट ग्रोथ में 16.1 प्रतिशत का तगड़ा उछाल दर्ज किया गया है, जिसके बाद कुल लोन बुक 11.5 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गई है.
खबर आते ही शेयर बाजार में निवेशकों ने शुरू की बिकवाली, शेयर 4% से ज्यादा टूटा
बिजनेस फंडामेंटल्स मजबूत होने के बावजूद, शेयर बाजार के निवेशकों ने ₹5,700 करोड़ के अचानक आए इस तात्कालिक वित्तीय झटके को भांपते हुए मुनाफावसूली और बिकवाली का रुख अपना लिया. बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा इस मेगा सेटलमेंट की आधिकारिक घोषणा किए जाने के तुरंत बाद गुरुवार को कारोबारी सत्र के दौरान इसके शेयरों पर भारी दबाव देखा गया. चौतरफा बिकवाली के चलते बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर (BoB Share Price) 4 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ. हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सालों पुराने इस कानूनी विवाद का हमेशा के लिए खत्म होना लंबी अवधि में बैंक की साख के लिए एक पॉजिटिव कदम साबित हो सकता है.
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