नीतीश कुमार के ठीक बगल में मिला निशांत को नया आशियाना, अब लगा रहेगा आना-जाना; बिहार की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नई और बेहद दिलचस्प प्रशासनिक हलचल ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ठीक बगल में अब उनके बेटे निशांत कुमार का नया ठिकाना बनने जा रहा है। सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री आवास के बिल्कुल करीब निशांत कुमार को आवास आवंटित होने से यह साफ है कि पिता-पुत्र के बीच अब मुलाकातों और मशवरों का दौर और तेज होगा। राजनीतिक पंडित इस नए ठिकाने को सिर्फ एक घर के बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि बिहार के आगामी सियासी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।

मुख्यमंत्री आवास के पास बंगला मिलने की क्या है असली वजह

प्रशासनिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, सुरक्षा और पारिवारिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री आवास के बिल्कुल नजदीक वाले वीवीआईपी बंगले को निशांत कुमार के लिए तैयार किया गया है। चूंकि निशांत अमूमन लाइमलाइट और सक्रिय राजनीति से दूर ही रहते हैं, इसलिए अचानक मुख्यमंत्री के ठीक बगल वाले घर में उनका शिफ्ट होना हर किसी को चौंका रहा है। इस नए ठिकाने की वजह से अब दोनों के बीच रोजाना का आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा, जिसे लेकर पटना के पोलो रोड और राजभवन के पास के सियासी हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

परदे के पीछे से नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की अटकलें हुई तेज

निशांत कुमार को नीतीश कुमार के बगल में जगह मिलने के बाद विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक के नेता इसके मायने निकालने में जुट गए हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज है कि क्या नीतीश कुमार अपने बेटे को धीरे-धीरे शासन और राजनीति के तौर-तरीके सिखाने की तैयारी कर रहे हैं? हालांकि जेडीयू (JDU) के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह से एक पारिवारिक और सुरक्षा से जुड़ा मामला है और इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इसके बावजूद, कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में निशांत कुमार परदे के पीछे से कोई बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

पटना से लेकर दिल्ली तक बिहार के नए सियासी भविष्य पर टिकीं नजरें

बिहार की इस नई ‘बंगला पॉलिटिक्स’ ने पटना के साथ-साथ दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सहित अन्य विपक्षी दल इस मामले पर बारीक नजर रखे हुए हैं। आम जनता और सोशल मीडिया पर भी यह सवाल तैर रहा है कि क्या बिहार में कोई नया उत्तराधिकारी तैयार हो रहा है? आने वाले दिनों में यह नया ठिकाना बिहार की जेडीयू-बीजेपी सरकार और विपक्षी दलों के बीच बयानों का नया मुद्दा बन सकता है, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ आने की पूरी उम्मीद है।