
महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने उद्धव ठाकरे और उनके गुट को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे को एक के बाद एक लग रहे झटकों के बीच अब तक का सबसे करारा झटका लगा है। आदित्य ठाकरे के बेहद करीबी, युवाओं के बीच लोकप्रिय और मुंबई की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले कद्दावर नेता सचिन अहीर ने भी आखिरकार उद्धव गुट का साथ छोड़ दिया है। इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद माना जा रहा है कि मुंबई और महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) की बची-खुची उम्मीदें और जमीन भी अब धीरे-धीरे खिसकती जा रही है।
आदित्य ठाकरे के ‘राइट हैंड’ माने जाते थे सचिन अहीर, पार्टी में मची खलबली
सचिन अहीर का शिवसेना (UBT) छोड़ना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह उद्धव और विशेष रूप से आदित्य ठाकरे के लिए एक बहुत बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक नुकसान है। सचिन अहीर को आदित्य ठाकरे का सबसे खास सिपहसालार और रणनीतिकार माना जाता था। मुंबई के वर्ली और आसपास के इलाकों में पार्टी को मजबूत करने और युवाओं को जोड़ने में उनकी भूमिका सबसे अहम थी। उनके इस अचानक लिए गए फैसले से मातोश्री और पार्टी के भीतर भारी खलबली मच गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि सचिन अहीर के जाने के बाद उद्धव गुट के कई और बड़े चेहरे भी जल्द ही पाला बदल सकते हैं।
क्यों लगातार साथ छोड़ रहे हैं पुराने दिग्गज, क्या है अंदरूनी वजह
महाराष्ट्र के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रही उपेक्षा और भविष्य की अनिश्चितता के कारण पुराने और जमीनी नेता लगातार उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ रहे हैं। महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर सीटों के तालमेल और सांगठनिक फैसलों में अपनी बात न सुने जाने से कई नेता लंबे समय से नाराज चल रहे थे। सचिन अहीर का जाना यह साफ संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं का अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व और पार्टी की वापसी की उम्मीदों से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। इस दलबदल ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आगामी चुनावों से पहले उद्धव गुट को बैकफुट पर ला दिया है।
मुंबई की लोकल राजनीति पर पड़ेगा इसका सबसे बड़ा और सीधा असर
जियोपॉलिटिकल और लोकल (Geographical) ऑप्टिमाइजेशन के नजरिए से देखें तो मुंबई, ठाणे और कोंकण क्षेत्र की राजनीति में इस इस्तीफे का बहुत बड़ा दूरगामी असर पड़ने वाला है। सचिन अहीर का वर्ली और मध्य मुंबई के श्रमिक वर्गों के बीच एक मजबूत वोट बैंक और जनाधार है। उनके इस कदम से न केवल वर्ली विधानसभा सीट पर आदित्य ठाकरे की मुश्किलें बढ़ेंगी, बल्कि मुंबई के अन्य हिस्सों में भी पार्टी का सांगठनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा सकता है। एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन (GEO) के राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति गठबंधन को मुंबई के गढ़ में और मजबूत करने का सुनहरा मौका देगा।
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