‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को बड़ा झटका: क्या 2034 से पहले संभव है एक साथ चुनाव, जानिए क्या है पूरी सच्चाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी एक देश, एक चुनाव को लेकर चल रही केंद्र सरकार की कोशिशों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के लिए पेश किए गए बिल की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट में देरी की संभावना ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। जानकारों का मानना है कि इस महत्वकांक्षी सुधार को जमीन पर उतारने के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

JPC रिपोर्ट में देरी के आसार, बढ़ सकता है कार्यकाल

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े बिल की बारीकियों की समीक्षा कर रही JPC आगामी मॉनसून सत्र में अपनी रिपोर्ट शायद ही पेश कर पाएगी। हालांकि लोकसभा ने समिति का कार्यकाल मॉनसून सत्र के अंतिम दिन तक बढ़ाया था, लेकिन देशभर में हितधारकों के साथ परामर्श की प्रक्रिया अभी अधूरी है। बीजेपी सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली 39 सदस्यीय यह समिति फिलहाल संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक की जांच कर रही है। अब तक 10 राज्यों का दौरा कर चुकी यह समिति अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र से और समय की मांग कर सकती है।

2034 से पहले चुनाव की उम्मीदें कम

इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पैनल के अध्यक्ष ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि विधायी प्रक्रिया के पूरे होने के बाद भी 2034 से पहले पूरे देश में एक साथ चुनाव होना लगभग नामुमकिन है। केंद्र सरकार का तर्क है कि इससे बार-बार होने वाले चुनावों के भारी आर्थिक बोझ से बचा जा सकेगा और आचार संहिता के कारण विकास कार्यों में आने वाली रुकावटें खत्म होंगी। इसके उलट, विपक्ष का मानना है कि यह भारत के संघीय ढांचे और राज्यों के संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

संख्या बल की चुनौती: NDA के लिए राह आसान नहीं

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेदों 83, 172 और 324A में संशोधन करना अनिवार्य होगा। इसके लिए संसद में साधारण नहीं, बल्कि विशेष बहुमत की आवश्यकता है। संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए तीन प्रमुख शर्तें अनिवार्य हैं: लोकसभा और राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत और देश के कम से कम 50% राज्यों की विधानसभाओं का अनुमोदन। वर्तमान आंकड़ों पर गौर करें तो NDA को लोकसभा में 362 और राज्यसभा में 164 सीटों के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए कड़ा संघर्ष करना होगा। हालांकि, 20 राज्यों में सत्ता में होने के कारण राज्यों का समर्थन हासिल करना NDA के लिए तुलनात्मक रूप से आसान कड़ी साबित हो सकती है। सरकार अब इस प्रोजेक्ट को परिसीमन बिल से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है ताकि राजनीतिक समर्थन जुटाया जा सके।

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