
देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश का सिलसिला भले ही शुरू हो गया हो, लेकिन कई इलाके अब भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। मौसम विभाग (IMD) से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में अभी तक सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि अगले महीने तक मानसून पूरे देश को कवर कर लेगा, जिससे इस कमी के कुछ हद तक पूरा होने की उम्मीद है। लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चिंता ‘अल नीनो’ (El Nino) के प्रभाव को लेकर है, जिसके चलते इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने का खतरा काफी हद तक बढ़ गया है।
अल नीनो के आगे बेअसर हो रहा IOD, IMD ने दी 10% कम बारिश की चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अल नीनो के इस खतरनाक असर को केवल ‘इंडियन ओशन डाइपोल’ (IOD) नामक मौसमी घटना ही कम कर सकती है, लेकिन इस बार IOD से भी मदद मिलने की उम्मीद बेहद कम दिखाई दे रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि इस साल मानसून सामान्य से 10 प्रतिशत कम रह सकता है। IMD ने पहले ही ‘नॉर्मल से कम’ बारिश का अनुमान जताया था। विभाग के अनुसार, इसकी 60% संभावना है कि जून से सितंबर के दौरान कुल मानसूनी बारिश में 10% या उससे ज्यादा की कमी दर्ज की जाएगी।
IOD क्या होता है, और 2023 से इसकी तुलना क्यों हो रही है?
अगर इतिहास पर नजर डालें तो साल 2023 एक बेहतरीन उदाहरण है, जब एक मजबूत और पॉजिटिव IOD ने बेहद ताकतवर अल नीनो के प्रभाव को काफी हद तक दबा दिया था, जिसके चलते भारत में लगभग सामान्य सीजनल बारिश देखने को मिली थी। तकनीकी भाषा में समझें तो IOD (इंडियन ओशन डाइपोल) एक ऐसी जलवायु घटना है जो हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच समुद्र की सतह के तापमान के अंतर को दर्शाती है। यह अल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन (ENSO) के साथ मिलकर भारत के गर्मियों के मानसून को तय करने में सबसे मुख्य भूमिका निभाता है।
किसानों की बढ़ी मुश्किलें, कई राज्यों में सूखे की आहट
IMD के इस पूर्वानुमान ने देश के अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। जून से सितंबर के बीच सामान्य से कम बारिश के अनुमान के कारण कई कृषि प्रधान राज्यों में सूखे का संकट गहरा गया है। भारत के ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़ी संख्या में किसान पूरी तरह से खेती के लिए मानसूनी बारिश के पानी पर ही निर्भर हैं। ऐसे में पानी की भारी कमी सीधे तौर पर फसलों की बुवाई और पैदावार को प्रभावित कर सकती है, जिसका असर आगे चलकर खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
आंकड़ों में समझें: मेघालय से लेकर यूपी-बिहार तक मानसून की भारी कमी
देश के अलग-अलग राज्यों से आ रहे बारिश के आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं। पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय में सबसे ज्यादा 82 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी राज्य गुजरात में यह कमी 79 प्रतिशत तक पहुंच गई है। अन्य राज्यों की बात करें तो मणिपुर में 71%, छत्तीसगढ़ में 68%, झारखंड में 66%, महाराष्ट्र में 59%, उत्तर प्रदेश में 56%, ओडिशा में 52% और बिहार में अब तक सामान्य से 50% कम बारिश हुई है। मध्य प्रदेश, जो कि कोर मानसून क्षेत्र के अंतर्गत आता है और जहां की खेती पूरी तरह इसी पर टिकी है, वहां भी सामान्य से 41% कम पानी बरसा है।
दक्षिण और मध्य भारत का भी बुरा हाल, मौसम विभाग की पैनी नजर
हैरानी की बात यह है कि दक्षिण भारत के राज्यों जैसे कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में मानसून ने अपने तय समय से 2-3 सप्ताह पहले ही दस्तक दे दी थी, इसके बावजूद इन राज्यों में 30% से अधिक की कमी रिकॉर्ड की गई है। अगर पूरे देश के क्षेत्रों की बात करें, तो मध्य भारत में सबसे ज्यादा 57% की गिरावट देखी गई है। इसके बाद पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में 44%, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 30% और उत्तर-पश्चिम भारत में 27% कम बारिश हुई है। मौसम विभाग आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार और एल नीनो के बदलते पैटर्न पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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