
नई दिल्ली/हेल्थ डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बंद कमरों या ऑफिस में घंटों काम करने की आदत और धूप से दूरी के कारण ‘विटामिन डी’ की कमी एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुकी है। आमतौर पर लोग विटामिन डी को सिर्फ मजबूत हड्डियों और दांतों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के बढ़ते दौर में अब इसके कई और चौंकाने वाले पहलू सामने आ रहे हैं। हाल के वर्षों में हुए कई अंतरराष्ट्रीय शोधों में विटामिन डी और दिल (Heart) की सेहत के बीच एक गहरा कनेक्शन देखा गया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या शरीर में इस जरूरी विटामिन की कमी आपके दिल को भी बीमार कर सकती है? आइए जानते हैं इस विषय पर नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की क्या राय है।
क्या विटामिन डी की कमी सीधे तौर पर बढ़ाती है हार्ट अटैक का खतरा?
यूएसए के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) और कई कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, जिन लोगों के शरीर में लंबे समय तक विटामिन डी का स्तर कम रहता है, उनमें दिल से जुड़ी बीमारियों (Cardiovascular Diseases) का जोखिम दूसरों के मुकाबले अधिक देखा गया है। दरअसल, विटामिन डी हमारे शरीर में सिर्फ एक पोषक तत्व की तरह नहीं, बल्कि एक हार्मोन की तरह काम करता है, जो ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) के लचीलेपन और हार्ट की मांसपेशियों के संकुचन को नियंत्रित करने में मदद करता है।
हालांकि, डॉक्टरों ने यहां एक जरूरी बात साफ की है। अभी तक उपलब्ध क्लिनिकल रिसर्च यह पूरी तरह और सीधे तौर पर साबित नहीं कर पाए हैं कि केवल विटामिन डी की कमी ही हार्ट अटैक या दिल की बीमारी का एकमात्र कारण है। दिल की सेहत बिगड़ना कई अन्य बड़े फैक्टर्स पर भी निर्भर करता है, जैसे—हाई ब्लड प्रेशर, अनकंट्रोल्ड डायबिटीज, बढ़ता मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और धूम्रपान (Smoking)। इसलिए विटामिन डी की कमी को दिल की बीमारी का इकलौता कारण मानने के बजाय एक बड़ा ‘रिस्क फैक्टर’ माना जाता है।
शरीर में विटामिन डी कम होने पर दिखते हैं ये 6 शुरुआती लक्षण
कई बार विटामिन डी का स्तर गिरने पर शुरुआत में कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देता, जिसे ‘साइलेंट डेफिसिएंसी’ भी कहते हैं। लेकिन जब यह कमी बढ़ने लगती है, तो शरीर नीचे दिए गए संकेत देने लगता है:
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लगातार थकान और सुस्ती: भरपूर नींद और अच्छे खानपान के बाद भी दिनभर शरीर टूटा-टूटा रहना और अत्यधिक कमजोरी महसूस होना।
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मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द: उठने-बैठने में मांसपेशियों में खिंचाव, कमजोरी या ऐंठन की शिकायत रहना।
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हड्डियों और पीठ में लगातार दर्द: विशेषकर रीढ़ की हड्डी (Spine) और पैरों की हड्डियों में एक हल्का, लगातार बना रहने वाला दर्द।
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बार-बार बीमार पड़ना: इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाने के कारण सर्दी, जुकाम, खांसी या अन्य सीजनल इन्फेक्शन की चपेट में जल्दी आ जाना।
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घाव भरने में समय लगना: किसी भी तरह की चोट या सर्जरी के घाव को ठीक होने में सामान्य से ज्यादा वक्त लगना।
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मूड स्विंग्स और तनाव: शरीर में न्यूरोट्रांसमीटर के प्रभावित होने से अचानक डिप्रेशन, एंग्जायटी या उदासी महसूस होना।
कैसे बनाए रखें विटामिन डी का सही स्तर? अपनाएं ये 3 आसान तरीके
शरीर में विटामिन डी ($Vitamin\ D$) का ऑप्टिमम लेवल बनाए रखने के लिए किसी महंगी दवा की नहीं, बल्कि सही लाइफस्टाइल की जरूरत होती है:
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गुनगुनी धूप सबसे बेस्ट: सूर्य की किरणें विटामिन डी का सबसे बड़ा और मुफ्त स्रोत हैं। रोजाना सुबह के समय 15 से 20 मिनट की हल्की धूप में बैठें या टहलें। ध्यान रहे कि दोपहर की तेज धूप त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए सुबह की गुनगुनी धूप ही सबसे कारगर है।
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डाइट में शामिल करें ये चीजें: शाकाहारी भोजन में विटामिन डी के स्रोत थोड़े सीमित होते हैं, लेकिन आप फोर्टिफाइड दूध, फोर्टिफाइड अनाज, मशरूम और अंडे की जर्दी (Egg Yolk) को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। वहीं मांसाहारी लोग फैटी फिश (जैसे साल्मन या टूना) का सेवन कर सकते हैं।
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बिना डॉक्टर की सलाह के न लें सप्लीमेंट्स: अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो खुद से दवा दुकान से लाकर विटामिन डी के हाई-डोज सप्लीमेंट्स (जैसे 60K कैप्सूल) खाना शुरू न करें। सबसे पहले किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह पर 25-Hydroxy Vitamin D ब्लड टेस्ट करवाएं। जांच में कमी आने पर डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार सही डोज तय करेंगे, क्योंकि शरीर में विटामिन डी की अत्यधिक मात्रा (Vitamin D Toxicity) भी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
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