
नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: एक दौर था जब भारत में सुरक्षित निवेश और टैक्स बचाने का जिक्र होते ही सबसे पहला नाम पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) का आता था। हर नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवार की यह पहली पसंद हुआ करता था। हालांकि, बदलते आर्थिक परिदृश्य, शेयर बाजार की तेजी और नए दौर के निवेश विकल्पों के आने के बाद इसके आकर्षण में थोड़ी कमी जरूर देखी गई है, लेकिन इसकी असल अहमियत आज भी कम नहीं हुई है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि PPF आज भी उन निवेशकों के लिए एक बेहद भरोसेमंद और अचूक हथियार है, जो बिना किसी जोखिम के लंबे समय के लिए एक बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं।
क्यों बदला PPF का समीकरण? समझिए बाजार का नया मिजाज
पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक और घरेलू स्तर पर ब्याज दरों में आए उतार-चढ़ाव के कारण PPF पर मिलने वाले ब्याज में पहले की तुलना में गिरावट आई है। इसके साथ ही, देश में ‘न्यू टैक्स रीजीम’ (नई कर व्यवस्था) को अपनाने वाले करदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिसके कारण पीपीएफ में मिलने वाली पारंपरिक टैक्स छूट (Section 80C) का आकर्षण उन लोगों के लिए थोड़ा कम हुआ है। दूसरी तरफ, म्यूचुअल फंड (SIP) और इक्विटी मार्केट ने पिछले कुछ सालों में निवेशकों को बंपर रिटर्न दिया है। यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी निवेश के लिए केवल पारंपरिक योजनाओं पर निर्भर न रहकर आक्रामक विकल्पों की ओर बढ़ रही है।
आज भी क्यों ‘किंग’ है PPF? जानिए इसकी 3 सबसे बड़ी खूबियां
बाजार में सैकड़ों तरह के एसेट क्लास (निवेश के प्रकार) होने के बावजूद PPF आज भी अपनी कुछ खासियतों की वजह से सबसे अलग और मजबूत खड़ा है:
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सौ फीसदी सरकारी गारंटी: इस योजना में जमा किए गए आपके पैसे और उस पर मिलने वाले ब्याज पर सीधे भारत सरकार की संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) होती है। यानी बाजार चाहे कितना भी गिरे या डूबे, आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
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मजबूत EEE स्टेटस का लाभ: पीपीएफ को आज भी ‘एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट’ (EEE) का दर्जा प्राप्त है। इसका मतलब है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत निवेश की गई रकम, उस पर सालाना मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी (15 साल पूरे होने पर) के समय मिलने वाली पूरी रकम पूरी तरह से टैक्स-फ्री होती है।
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चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding) की ताकत: लंबी अवधि (15 वर्ष) की योजना होने के कारण इसमें कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है, जो धीरे-धीरे आपकी छोटी बचत को एक बहुत बड़े कॉर्पस (फंड) में तब्दील कर देता है।
एसेट एलोकेशन की रणनीति: संतुलित पोर्टफोलियो का आधार बनाएं
पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के दौर में समझदारी इसी में है कि आप पीपीएफ को अपने कुल निवेश का इकलौता जरिया बनाने के बजाय, इसे अपने पोर्टफोलियो के ‘डेट हिस्से’ (Safe Investment Portion) के रूप में इस्तेमाल करें। एक आदर्श रणनीति यह हो सकती है कि आप लंबी अवधि में महंगाई को मात देने वाले बेहतर रिटर्न के लिए म्यूचुअल फंड्स और इक्विटी में निवेश करें, और बाजार के जोखिम को संतुलित करने के लिए पीपीएफ में पैसा डालें। जब शेयर बाजार में भारी गिरावट या उतार-चढ़ाव आता है, तब पीपीएफ से मिलने वाला सुरक्षित और स्थिर रिटर्न आपके पोर्टफोलियो को मजबूती और आपको मानसिक सुकून देता है।
पीपीएफ में निवेश करने से पहले खुद से जरूर पूछें ये जरूरी सवाल
आज के समय में हर निवेशक के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके वित्तीय लक्ष्य क्या हैं। निवेश करने से पहले अपनी आय, उम्र और रिस्क प्रोफाइल (जोखिम लेने की क्षमता) का आकलन जरूर करें। अगर आपका मुख्य उद्देश्य बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी या खुद के लिए एक सुरक्षित रिटायरमेंट फंड तैयार करना है जहां सुरक्षा पहली प्राथमिकता हो, तो पीपीएफ आज भी आपके लिए सबसे बेहतरीन और अनिवार्य विकल्प है। वहीं, अगर आप अपनी संपत्ति को तेजी से बढ़ाना चाहते हैं, तो पीपीएफ के सुरक्षित कवच के साथ इक्विटी आधारित निवेश को मिलाकर एक बैलेंस एप्रोच अपनाना ही सबसे बड़ी समझदारी होगी।
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