
भारतीय मत्स्य बाजार में मछलियों की मांग हमेशा सातवें आसमान पर रहती है। कई मछलियां अपनी बेहतरीन ग्रोथ और स्वाद के लिए जानी जाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी मछली भी है जो महज कुछ ही महीनों में बहुत तेजी से बढ़ती है, जिसे पालने में लागत न के बराबर आती है और बाजार में जिसकी अवैध बिक्री से लोग लाखों कमाते हैं—फिर भी भारत सरकार ने इसे देश में पूरी तरह से बैन (Prohibited) कर रखा है। पहली नजर में यह बात चौंकाने वाली लग सकती है कि इतनी मुनाफेदार चीज पर पाबंदी क्यों है, लेकिन इसके पीछे की जो खौफनाक वजह है, उसने वैज्ञानिकों से लेकर पर्यावरणविदों तक की रातों की नींद उड़ा रखी है।
आखिर कौन सी है यह मछली और क्यों इसे कहा जाता है ‘जलीय दानव’
हम जिस मछली की बात कर रहे हैं, उसका नाम है ‘थाई मांगुर’ (Thai Magur) या अफ्रीकन कैटफिश (African Catfish)। सामान्य देसी मांगुर के विपरीत, यह हाइब्रिड प्रजाति बेहद खतरनाक मानी जाती है। इसके बैन होने की सबसे पहली और बड़ी वजह इसका मांसाहारी और बेहद आक्रामक स्वभाव है। यह मछली पानी के भीतर एक ‘साइलेंट किलर’ या जलीय दानव की तरह काम करती है। यह इतनी भूखी और हिंसक होती है कि जिस तालाब या नदी में इसे पाला जाता है, वहां मौजूद दूसरी सभी स्थानीय मछलियों, कछुओं, मेंढकों और जलजीवों को खाकर उनका अस्तित्व पूरी तरह खत्म कर देती है। इससे हमारा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) पूरी तरह तबाह हो जाता है।
गंदे गटर के पानी में भी हो जाती है बड़ी, इंसानी सेहत के लिए है ‘धीमा जहर’
थाई मांगुर की सबसे बड़ी खासियत और खराबी यह है कि यह किसी भी तरह के बेहद गंदे, प्रदूषित और गटर के पानी में भी आसानी से जिंदा रह सकती है और बहुत तेजी से अपना वजन बढ़ा लेती है। इसके इस स्वभाव का फायदा उठाकर कुछ लालची कारोबारी इसे सड़े-गले मांस, मरे हुए जानवरों के अवशेष और गंदी चीजें खिलाकर पालते हैं। इस वजह से इस मछली के शरीर में भारी मात्रा में लेड (सीसा), आयरन और खतरनाक बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों के मुताबिक, इस दूषित थाई मांगुर मछली का सेवन करने से इंसानों में कैंसर, लिवर डैमेज, पेट की गंभीर बीमारियां और स्किन इंफेक्शन होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह सेहत के लिए किसी धीमे जहर से कम नहीं है।
सरकार की सख्त पाबंदी और भारी जुर्माने के बावजूद क्यों फल-फूल रहा है इसका काला बाजार
भारत सरकार और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इसके खतरनाक दुष्प्रभावों को देखते हुए साल 2000 में ही थाई मांगुर के पालन, बिक्री और परिवहन पर देशव्यापी प्रतिबंध लगा दिया था। स्थानीय प्रशासन और मत्स्य विभाग अक्सर छापेमारी करके हजारों क्विंटल अवैध मांगुर को नष्ट भी करते हैं। इसके बावजूद, चोरी-छिपे इसका काला बाजार इसलिए फल-फूल रहा है क्योंकि यह मछली बेहद सस्ती दरों पर मिल जाती है और आम लोग अनजाने में इसे देसी मांगुर समझकर खरीद लेते हैं। अगर आप भी बाजार से मछली खरीदते हैं, तो अत्यधिक गहरे काले या भूरे रंग की बड़ी मांगुर मछली को खरीदने से बचें, क्योंकि आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके पूरे परिवार की सेहत को बड़े खतरे में डाल सकती है।
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