Google की आलीशान नौकरी को २३ साल की उम्र में कहा अलविदा, अब AI स्टार्टअप ‘Bounty’ से दुनिया बदलने निकलीं आशना दोशी

नौकरी की सुरक्षा, शानदार कॉर्पोरेट लाइफ और हर महीने आने वाली मोटी सैलरी को छोड़कर अपने अनूठे सपनों के पीछे भागना हर किसी के बस की बात नहीं होती। खासकर तब, जब नौकरी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक Google में हो। लेकिन २३ वर्षीय भारतीय मूल की आशना दोशी ने वही रास्ता चुना, जिसे ज्यादातर लोग बेहद जोखिम भरा और नासमझी मानते हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता Google जैसी दिग्गज कंपनी को छोड़ना नहीं थी, बल्कि यह थी कि अगर उन्होंने अपने क्रांतिकारी विचारों को मौका नहीं दिया, तो शायद जिंदगी भर इसका अफसोस रहेगा।

आशना की यह कहानी आज के उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो सुरक्षित करियर और अपने स्टार्टअप के सपनों के बीच फैसला लेने की दुविधा में फंसे रहते हैं।

ग्रेजुएशन से पहले ही मिल गया था Google का बुलावा

आशना दोशी जब ‘जॉर्जिया टेक’ (Georgia Tech) यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थीं, तभी फरवरी २०२४ में गूगल ने उन्हें फुल-टाइम सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी का ऑफर दे दिया था। शुरुआत में यह पोस्टिंग कैलिफोर्निया में थी, लेकिन आशना न्यूयॉर्क में रहकर अपना करियर शुरू करना चाहती थीं।

उस दौर में जब नए ग्रेजुएट्स के लिए मंदी के कारण नौकरी पाना बेहद मुश्किल था, आशना ने कैलिफोर्निया का वह ऑफर ठुकरा दिया। उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ ही महीनों बाद गूगल ने उन्हें न्यूयॉर्क स्थित ऑफिस में उनकी पसंद की भूमिका (Role) ऑफर कर दी।

कोडिंग में सब अच्छा था, पर दिल पॉडकास्टिंग के लिए धड़क रहा था

गूगल न्यूयार्क में काम करते हुए आशना ने बेहतरीन तकनीकी अनुभव हासिल किया और दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली दिमागों के साथ काम किया। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें महसूस होने लगा कि उनका असली पैशन सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन पर कोडिंग करने तक सीमित नहीं है। उन्हें लोगों की असल कहानियां सुनना, नए इनोवेटिव विचारों पर चर्चा करना और खुद की एक पहचान बनाना ज्यादा आकर्षित करने लगा।

साल २०२५ की शुरुआत में उन्होंने एक अन्य टेक इंजीनियर के साथ मिलकर “0 to 1” नाम का एक बिजनेस पॉडकास्ट शुरू किया। इस शो में वे बड़े उद्यमियों, इंजीनियरों और बिजनेस लीडर्स की सफलता और उनके संघर्ष की कहानियां साझा करती थीं। धीरे-धीरे यह पॉडकास्ट इतना लोकप्रिय हुआ कि एक साल के भीतर ही इसके यूट्यूब पर १ लाख से ज्यादा व्यूज हो गए और इसी के बहाने उनकी मुलाकात Amazon और Microsoft जैसी बड़ी कंपनियों के टॉप एग्जीक्यूटिव्स से हुई।

AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की दुनिया में दिखा बड़ा मौका

पॉडकास्ट की सफलता के साथ आशना के मन में खुद का वेंचर शुरू करने का विचार और मजबूत होता गया। उनका मानना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का मौजूदा दौर नए उद्यमियों के लिए सदी का सबसे बड़ा अवसर लेकर आया है। उन्हें लगा कि अगर कुछ बड़ा करना है, तो यही सही समय है जब रिस्क उठाकर तकनीक की दुनिया में कुछ नया स्थापित किया जाए।

Google को कहा अलविदा, शुरू किया AI आधारित मार्केटप्लेस “Bounty”

मई २०२६ में आशना ने आखिरकार Google की अपनी आलीशान नौकरी को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया और अपने पॉडकास्ट पार्टनर के साथ मिलकर “Bounty” नाम का एक टेक AI स्टार्टअप शुरू किया।

क्या है Bounty स्टार्टअप?

‘Bounty’ मूल रूप से एक अत्याधुनिक AI आधारित मार्केटप्लेस है, जहां दुनिया भर की कंपनियां अपनी भर्ती (Recruitment), बिजनेस आउटरीच और लीड जनरेशन जैसे महत्वपूर्ण काम पोस्ट कर सकती हैं। इस स्टार्टअप का सबसे अनोखा मॉडल यह है कि कंपनियों को केवल परिणाम (Results) मिलने पर ही भुगतान करना होता है।

कमाई घटी, पर बढ़ा आत्मविश्वास: ‘रुक जाना सबसे बड़ा डर था’

आशना बेहद बेबाकी से मानती हैं कि कॉर्पोरेट लाइफ छोड़ने के बाद आर्थिक अनिश्चितता काफी बढ़ गई है। फिलहाल उनका स्टार्टअप शुरुआती स्टेज में होने के कारण कोई कमाई नहीं कर रहा है और पॉडकास्ट से भी अभी कोई डायरेक्ट रेवेन्यू नहीं है। इसके बावजूद उन्हें अपने इस बड़े फैसले पर रत्ती भर भी पछतावा नहीं है।

उनका कहना है कि Google छोड़ना उनके लिए डरावना नहीं था, बल्कि वहां की आरामदायक जिंदगी में रहकर हमेशा यह सोचते रहना ज्यादा डरावना था कि वह अपनी जिंदगी में और क्या बड़ा कर सकती थीं। सुरक्षित नौकरी में रहकर हमेशा “क्या होता अगर…” की कशमकश में जीने से बेहतर है कि जमीन पर उतरकर रिस्क लिया जाए।