‘परिसीमन पर विपक्ष का भ्रम तथ्यहीन’: नारीशक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सीएम धामी का कांग्रेस पर बड़ा प्रहार

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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारीशक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) के पारित न होने के लिए कांग्रेस और विपक्षी दलों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। रविवार को भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीएम धामी ने कहा कि विपक्ष ने अपनी नकारात्मक राजनीति और ‘दलगत स्वार्थ’ को देशहित और आधी आबादी के हक से ऊपर रखा है।

सीएम धामी के संबोधन के मुख्य बिंदु

1. परिसीमन की आशंकाओं को बताया ‘झूठा’

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर सफाई दी।

तथ्यहीन दावे: धामी ने कहा कि परिसीमन को लेकर विपक्ष की आशंकाएं पूरी तरह आधारहीन हैं। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसका लक्ष्य जनसंख्या के आधार पर न्यायसंगत प्रतिनिधित्व देना है।

संतुलित वृद्धि: प्रस्तावित व्यवस्था में सभी राज्यों के लिए सीटों की समान वृद्धि का प्रावधान है, जिससे किसी भी राज्य के हितों को ठेस नहीं पहुँचती।

2. “विपक्ष ने मनाया महिलाओं के हक छिनने का जश्न”

सदन में नारीशक्ति वंदन अधिनियम के गिरने पर विपक्ष के रवैये को सीएम ने ‘शर्मनाक’ बताया।

बाधा बने विपक्षी दल: उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके ने सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय तकनीकी बहानों से इस ऐतिहासिक विधेयक को रोकने का प्रयास किया।

विधेयक का उद्देश्य: 131वां संशोधन विधेयक साल 2029 के आम चुनाव से महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था, ताकि जनगणना और परिसीमन के कारण होने वाली देरी को खत्म किया जा सके।

3. तुष्टिकरण और भटकाने की राजनीति

सीएम धामी ने समाजवादी पार्टी (सपा) की ‘धर्म आधारित आरक्षण’ की मांग पर भी तीखा प्रहार किया।

असंवैधानिक मांग: उन्होंने कहा कि सपा की यह मांग न केवल असंवैधानिक है बल्कि विपक्ष की तुष्टिकरण की नीति को दर्शाती है।

विरोध का पुराना इतिहास: मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि विपक्ष ने पहले भी तीन तलाक, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, सीएए (CAA) और जीएसटी जैसे महत्वपूर्ण सुधारों का इसी तरह विरोध किया था।

नारीशक्ति वंदन अधिनियम का महत्व

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार महिलाओं को नीति निर्माण में समान भागीदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 131वें संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से सरकार महिलाओं को आरक्षण का लाभ ‘यथाशीघ्र’ (As soon as possible) देना चाहती थी, लेकिन विपक्ष की ‘बाधित राजनीति’ ने इस अवसर को गंवा दिया।