बिहार में गूंजा ‘एक देश में दो विधान-दो निशान नहीं चलेंगे’ का नारा, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने किस महान बलिदान की दिलाई याद

बिहार की सियासत और राष्ट्रवाद के गलियारों से इस वक्त की एक बेहद बड़ी और वैचारिक रूप से महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Deputy CM Samrat Choudhary) ने एक विशेष कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र की एकता और अखंडता को लेकर एक बेहद आक्रामक और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक नारे ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ को बुलंद करते हुए पूरे देश को एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाले बलिदान की याद दिलाई। एक वरिष्ठ राजनीतिक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो सम्राट चौधरी का यह बयान केवल एक राजनीतिक भाषण नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के निर्माण, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की उस लंबी लड़ाई की याद दिलाता है जिसके लिए एक महान देशभक्त ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के उस ऐतिहासिक और सर्वोच्च बलिदान की पूरी इनसाइड स्टोरी

इस बड़े बयान के पीछे छिपे ऐतिहासिक और वैचारिक पृष्ठभूमि को अगर हम गहराई से समझें, तो सम्राट चौधरी ने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Dr. Syama Prasad Mookerjee) के बलिदान दिवस के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह बातें कहीं। आजादी के बाद जब जम्मू-कश्मीर में जाने के लिए अलग परमिट की व्यवस्था थी और वहां का अलग झंडा और अलग संविधान था, तब डॉ. मुखर्जी ने इस व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने नारा दिया था कि एक ही देश के भीतर दो प्रधान, दो विधान (संविधान) और दो निशान (झंडे) कभी स्वीकार नहीं किए जा सकते। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए वे बिना परमिट के जम्मू-कश्मीर की सीमा में दाखिल हुए थे, जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और रहस्यमयी परिस्थितियों में जेल के भीतर ही उनका सर्वोच्च बलिदान हो गया।

अनुच्छेद 370 का खात्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा हुआ वो अधूरा सपना

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की अखंडता के लिए जो सपना देखा था और जिस विचार के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया था, उसे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कड़े और ऐतिहासिक फैसलों ने सच कर दिखाया। साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हमेशा के लिए मलबे में मिलाकर केंद्र सरकार ने डॉ. मुखर्जी के उस अधूरे मिशन को तार्किक अंजाम तक पहुंचाया। आज कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक तिरंगा शान से लहरा रहा है और पूरे देश में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित एक ही संविधान पूरी तरह से प्रभावी है, जो हर भारतीय के लिए बेहद गर्व की बात है।

बिहार की भौगोलिक और राजनीतिक चेतना को राष्ट्रवाद से जोड़ने का बड़ा प्रयास

भौगोलिक और स्थानीय (Geographical Optimization) दृष्टिकोण से देखा जाए तो बिहार की भूमि हमेशा से ही राष्ट्रीय आंदोलनों और वैचारिक क्रांतियों की जननी रही है। पटना से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक के युवाओं में राष्ट्रवाद और सेना के प्रति एक अटूट सम्मान की भावना रहती है। सम्राट चौधरी का यह बयान बिहार के नागरिकों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी की इसी चेतना को झकझोरने और उन्हें देश के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराने का एक बड़ा प्रयास है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के वैचारिक बयानों के जरिए बीजेपी बिहार में अपनी जड़ों को और मजबूत कर रही है और जनता को यह याद दिला रही है कि राष्ट्रहित के मुद्दों पर उनकी प्रतिबद्धता कितनी अडिग है।

आधुनिक एआई सर्च और आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से क्यों ट्रेंडिंग है यह बयान

आधुनिक जेनेरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) और डिजिटल मीडिया के बदलते पैटर्न्स के लिहाज से ‘Samrat Choudhary Nationalism Statement’ इस वक्त इंटरनेट पर तेजी से सर्च किया जा रहा है। बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी इस समय बीजेपी के सबसे आक्रामक और लोकप्रिय चेहरों में से एक हैं। उनके इस बयान को आगामी सांगठनिक और स्थानीय चुनावों से पहले पार्टी के कोर एजेंडे यानी राष्ट्रवाद और एक देश-एक कानून की विचारधारा को जनता के बीच पुनर्जीवित करने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान और कश्मीर के बदलते हालातों को लेकर एक नई और सकारात्मक बहस छिड़ गई है।