अक्षय तृतीया पर हरिद्वार में आस्था का सैलाब: लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई डुबकी, जैन समाज ने मनाया ‘दान दिवस’

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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। 19 अप्रैल 2026 को ब्रह्ममुहूर्त से ही हरकी पैड़ी समेत गंगा के विभिन्न घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से अक्षय (कभी न खत्म होने वाला) पुण्य फल प्राप्त होता है।

प्रमुख आकर्षण और आयोजन

गंगा स्नान और पूजन: श्रद्धालुओं ने अलसुबह से ही पावन सलिला में डुबकी लगाकर सूर्य को अर्घ्य दिया। हरकी पैड़ी, सुभाष घाट और मालवीय घाट पर दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा।

वैदिक मंत्रोच्चार: नगर के विभिन्न आश्रमों, अखाड़ों और संस्कृत विद्यालयों में विशेष हवन-यज्ञ और अनुष्ठान आयोजित किए गए। छात्रों द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोच्चार से पूरी धर्मनगरी गुंजायमान रही।

परशुराम जयंती: अक्षय तृतीया के साथ ही भगवान परशुराम की जयंती भी हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कई स्थानों पर शस्त्र पूजन और शोभायात्राओं का आयोजन हुआ।

जैन समाज: श्रद्धा और सेवा का संगम

जैन समाज ने इस महापर्व को ‘दान दिवस’ के रूप में मनाया। मंगलौर स्थित श्री दिगम्बर जैन भगवान श्रेयांश नाथ मंदिर में विशेष आयोजन हुए:

शांतिधारा: भगवान आदिनाथ के चरणों में विश्व शांति और जीवों के कल्याण के लिए शांतिधारा की गई।

भक्तों की उपस्थिति: गुजरात, दिल्ली, गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर से आए श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लिया।

आर्यिका पूर्णमति माता का अवतरण दिवस: अष्टापद बड़ीनाथ में विहार कर रही आर्यिका रत्न माँ पूर्णमति माता के अवतरण दिवस पर भक्तों ने उन्हें वंदामि निवेदन किया और खुशियां मनाईं।

सांस्कृतिक संध्या: शाम को जैन समाज द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मंगल आरती का आयोजन किया गया, जिसमें रश्मि जैन समेत समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सुरक्षा और व्यवस्था

भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। यातायात को नियंत्रित करने के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया और घाटों पर जल पुलिस व गोताखोरों की तैनाती की गई ताकि स्नान शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।