ज्यादा तला-भुना खाने से ही नहीं, गर्मी में इस एक अनजान वजह से भी बढ़ता है बैड कोलेस्ट्रॉल, दिल के मरीज फौरन बरतें ये सावधानियां

तेजी से बदलते मौसम और चिलचिलाती गर्मी के इस सीजन में दिल की सेहत (Heart Health) को लेकर डॉक्टरों ने एक बेहद ही चौंकाने वाली चेतावनी जारी की है। आमतौर पर जब भी हाई कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol) की बात होती है, तो हमारा सारा ध्यान सिर्फ तैलीय भोजन, घी-मक्खन, समोसे-पकौड़े या अत्यधिक तला-भुना खाने पर ही जाता है। लेकिन आधुनिक मेडिकल रिसर्च और कार्डियोलॉजिस्ट्स (दिल के डॉक्टरों) ने खुलासा किया है कि गर्मियों के दिनों में बिना कुछ तला-भुना खाए भी आपके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। यह खबर उन लोगों के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल है जो सोचते हैं कि सिर्फ डाइट कंट्रोल करके वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। आइए इस विशेष हेल्थ रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर गर्मी का मौसम हमारे खून में कोलेस्ट्रॉल को कैसे प्रभावित करता है और दिल के मरीजों को इस वक्त किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।

तपती गर्मी और डिहाइड्रेशन: कैसे खून में गाढ़ा होने लगता है कोलेस्ट्रॉल

एक वरिष्ठ मेडिकल और हेल्थ रिपोर्टर के नजरिए से जब हम इस इनसाइड साइंस को समझते हैं, तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ‘डीहाइड्रेशन’ (शरीर में पानी की कमी) निकलकर सामने आती है। गर्मियों में तेज धूप और पसीने के कारण शरीर से पानी बहुत तेजी से बाहर निकल जाता है। जब कोई व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीता है, तो उसके शरीर का ब्लड वॉल्यूम (खून की कुल मात्रा) कम होने लगता है और खून गाढ़ा होने लगता है। खून के गाढ़े होने के कारण उसमें मौजूद कोलेस्ट्रॉल और फैट के कण अधिक संकुचित और केंद्रित हो जाते हैं, जिससे मेडिकल टेस्ट में कोलेस्ट्रॉल का लेवल अचानक बढ़ा हुआ दिखाई देता है। इसके अलावा, पानी की कमी होने पर लीवर को भी कोलेस्ट्रॉल को फिल्टर करने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है, जो दिल की धमनियों (Arteries) के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

समर सीजन में दिल के मरीजों पर क्यों बढ़ जाता है अचानक हार्ट अटैक का खतरा

गर्मियों के मौसम में हमारे दिल को शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखने के लिए सामान्य से कई गुना अधिक तेजी से पंप करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में कार्डिएक आउटपुट बढ़ जाता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि किसी मरीज की धमनियों में पहले से ही थोड़ा बहुत कोलेस्ट्रॉल जमा है, तो खून के गाढ़े होने और दिल की बढ़ी हुई रफ्तार के कारण अचानक ब्लॉकेज या ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) बनने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि यही वजह है कि गर्मियों के महीनों में भी स्ट्रोक और साइलेंट हार्ट अटैक के मामलों में अचानक तेजी देखने को मिलती है। इसके साथ ही, बहुत ज्यादा ठंडी जगहों (एसी रूम) से अचानक तेज धूप में निकलने पर होने वाला थर्मल शॉक भी दिल की नसों को सिकोड़ देता है।

गर्मी के दिनों में बैड कोलेस्ट्रॉल और दिल के रोगों से बचने के कारगर उपाय

अगर आप अपनी नसों में जमा होने वाले इस गंदे कोलेस्ट्रॉल को पिघलाना चाहते हैं और दिल को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो सबसे पहला और कड़ा नियम है कि अपने पानी पीने की मात्रा को बढ़ा दें। दिनभर में कम से कम ३ से ४ लीटर पानी, नींबू पानी, नारियल पानी या बिना चीनी की छाछ का सेवन जरूर करें ताकि बॉडी हमेशा हाइड्रेटेड रहे। अपनी डाइट में तरबूज, खीरा, ककड़ी और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें जो प्राकृतिक रूप से शरीर को ठंडा रखती हैं। सुबह या शाम के समय जब धूप कम हो, तभी हल्की वॉक या एक्सरसाइज करें; तेज दोपहर में घर से बाहर निकलने से पूरी तरह परहेज करें। अगर आप पहले से ही कोलेस्ट्रॉल या बीपी (Blood Pressure) की दवाइयां खा रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह के बिना उन्हें कभी भी बंद न करें।

इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, तुरंत लें डॉक्टर की सलाह

इस भीषण गर्मी में यदि आपको अचानक बहुत ज्यादा पसीना आने लगे, छाती में भारीपन या बाईं तरफ हल्का सा भी दर्द महसूस हो, तो इसे केवल गर्मी या गैस की समस्या मानकर टालने की भूल बिल्कुल न करें। इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ होना, अचानक बहुत ज्यादा चक्कर आना, या बिना किसी भारी काम के भी अत्यधिक थकान होना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका दिल खतरे में है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर धमनियों में रुकावट पैदा कर रहा है। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखते ही तुरंत नजदीकी कार्डियोलॉजिस्ट या फिजिशियन से संपर्क करें और अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर करवाएं। सतर्कता और सही लाइफस्टाइल ही इस मौसम में आपके दिल की सबसे बड़ी ढाल है।