
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और इसके आसपास के इलाकों में मॉनसून ने बेहद ही आक्रामक और धमाकेदार अंदाज में दस्तक दे दी है। पिछले २४ घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मायानगरी के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है और लोकल ट्रेनों की रफ्तार पर भी इसका असर दिखने लगा है। मुंबईकरों को भीषण गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन इसके साथ ही जलभराव की पुरानी समस्या ने एक बार फिर प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, मुंबई को सराबोर करने के बाद अब मानसूनी हवाएं तेजी से पड़ोसी राज्य गुजरात की तरफ बढ़ रही हैं। लेकिन इस बीच मौसम वैज्ञानिकों की एक नई चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है कि क्या इस धमाकेदार शुरुआत के बाद मॉनसून की रफ्तार पर दोबारा ब्रेक लगने जा रहा है।
मुंबई और कोंकण क्षेत्र में भारी बारिश का रेड अलर्ट
मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और पूरे कोंकण बेल्ट में बादलों ने डेरा डाल रखा है और रुक-रुक कर भारी से अति भारी बारिश का सिलसिला जारी है। आईएमडी ने अगले ४८ घंटों के लिए तटीय महाराष्ट्र के कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है क्योंकि इस दौरान तेज हवाओं के साथ ऊंची लहरें उठने की आशंका है। मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें और सड़क यातायात फिलहाल कछुआ गति से चल रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अरब सागर से आ रही मजबूत पश्चिमी हवाओं के कारण मॉनसून को भरपूर नमी मिल रही है, जिससे यह शुरुआती स्पेल इतना जोरदार साबित हो रहा है।
गुजरात में प्री-मॉनसून एक्टिविटी तेज, इस दिन होगी आधिकारिक एंट्री
महाराष्ट्र में अपनी ताकत दिखाने के बाद अब मॉनसून की अगली डेस्टिनेशन गुजरात है। अहमदाबाद, सूरत, वलसाड और नवसारी समेत दक्षिण गुजरात के कई हिस्सों में प्री-मॉनसून गतिविधियों के तहत तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो चुकी है। मौसम केंद्र के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों के भीतर मॉनसून आधिकारिक तौर पर गुजरात की सीमा में प्रवेश कर जाएगा। इसके प्रभाव से सौराष्ट्र और कच्छ के इलाकों में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। किसानों ने इस मानसूनी आहट को देखते हुए खरीफ फसलों की बुआई की तैयारियां तेज कर दी हैं, क्योंकि समय पर बारिश होना इस पूरे रीजन के कृषि सेक्टर के लिए बेहद संजीवनी साबित होता है।
लेकिन क्या फिर लग जाएगा ब्रेक? आईएमडी के इस पूर्वानुमान ने क्यों डराया
इस शुरुआती धमाकेदार एंट्री के बीच मौसम विभाग के एक अंदरूनी अनुमान ने पर्यावरणविदों और किसानों को थोड़ी चिंता में डाल दिया है। आईएमडी के विशेषज्ञों का संकेत है कि जून के आखिरी दिनों में अल नीनो के आंशिक प्रभाव या प्रशांत महासागर में बनने वाले कुछ कमजोर मौसमी सिस्टम्स के कारण मॉनसून की प्रोग्रेस थोड़ी धीमी पड़ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो मध्य और उत्तर भारत की तरफ बढ़ने वाले मॉनसून के पैर कुछ दिनों के लिए ठिठक सकते हैं, जिसे मौसम की भाषा में ‘मॉनसून ब्रेक’ कहा जाता है। हालांकि, मौसम विज्ञानियों का यह भी कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है और जुलाई की शुरुआत के साथ ही बंगाल की खाड़ी में बनने वाले नए कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के कारण मॉनसून एक बार फिर अपनी पूरी रफ्तार पकड़ लेगा।
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