
दिल्ली-एनसीआर के निवासियों और रोजाना नोएडा-ग्रेटर नोएडा की तरफ सफर करने वाले लोगों के लिए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। दिल्ली बॉर्डर से जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) तक का सफर अब पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और पूरी तरह से जाम-मुक्त होने वाला है। हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस बेहद महत्वाकांक्षी हाईवे परियोजना को हरी झंडी दे दी गई है। इस नए रूट के बनने से दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी बेहद सुगम हो जाएगी।
क्यों खास है यह नई एक्सप्रेसवे परियोजना? (Route & Length)
यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे केवल एक साधारण सड़क नहीं, बल्कि एक आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना होगा। इस प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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लंबाई और लेन: यह पूरा रूट लगभग 35.1 किलोमीटर लंबा होगा, जो पूरी तरह से 8-लेन का एलिवेटेड एक्सप्रेसवे (जमीन से ऊपर पिलर पर बना हुआ) के रूप में तैयार किया जाएगा।
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रूट मैप: यह शानदार रास्ता दिल्ली के डीएनडी (DND) फ्लाईवे से शुरू होगा और यमुना नदी के तटबंध (बांध) के समानांतर (Parallel) चलते हुए ग्रेटर नोएडा के घरबरा तक जाएगा।
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डायरेक्ट कनेक्टिविटी: घरबरा पहुंचने के बाद यह एक्सप्रेसवे सीधे यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) से कनेक्ट हो जाएगा, जिससे दिल्ली से चलने वाले वाहन बिना किसी ट्रैफिक लाइट या जाम के सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के भीतर एंट्री कर सकेंगे।
NHAI को मिली जिम्मेदारी; स्थानीय लोगों का भी रखा गया ध्यान
इस महा-परियोजना के निर्माण और समय पर पूरा करने का जिम्मा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपा गया है। एक्सप्रेसवे के डिजाइन में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि लंबी दूरी के यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी इसका फायदा मिले। इस स्ट्रक्चर में 8 मुख्य लेन तो होंगी ही, साथ ही 2 अतिरिक्त लेन मौजूदा स्थानीय सड़कों से जोड़ी जाएंगी ताकि आस-पास के गांवों और सेक्टरों में रहने वाले लोग भी आसानी से इस पर चढ़ और उतर सकें।
सिंचाई विभाग की आपत्ति के बाद क्यों बदला गया पुराना प्लान?
इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन को अपनी शुरुआती योजनाओं में एक बड़ा तकनीकी बदलाव करना पड़ा है:
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पुरानी योजना: शुरुआत में इंजीनियर्स का प्लान यमुना नदी के बाढ़ नियंत्रण वाले तटबंध (बांध) के ठीक ऊपर ही सड़क बनाने का था।
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आपत्ति और नया समाधान: उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने बांध की मजबूती, सुरक्षा और बाढ़ के खतरों को देखते हुए इस पुराने प्लान पर एनओसी (NOC) देने से साफ इनकार कर दिया था। विभाग की इस गंभीर आपत्ति के बाद प्लान बदला गया। अब बांध को बिना छुए, उसके बिल्कुल बगल में पिलर खड़े करके एक पूरी तरह एलिवेटेड एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जिससे पर्यावरण और नदी के सुरक्षा मानकों का भी उल्लंघन नहीं होगा।
कूटनीतिक जंक्शन बनेगा दिल्ली का DND फ्लाईवे
इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद दिल्ली का डीएनडी फ्लाईवे देश के सबसे बड़े और प्रमुख हाईवे हब (Junctions) के रूप में तब्दील हो जाएगा। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और दिल्ली-सहारनपुर एक्सप्रेसवे पहले से ही अक्षरधाम के पास से गुजर रहे हैं। अब इन दोनों बड़े हाईवे की लिंक लाइनों को मयूर विहार के रास्ते चिल्ला एलिवेटेड रोड से जोड़ा जाएगा। इस कनेक्टिविटी के चलते यात्रियों को मेरठ, सहारनपुर या पूर्वी दिल्ली से आकर सीधे जेवर एयरपोर्ट जाने के लिए एक सिग्नल-फ्री और सुपरफास्ट रूट मिल जाएगा।
समय की होगी भारी बचत, ट्रैफिक जाम से मिलेगी परमानेंट मुक्ति
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आगामी समय में पूरी तरह शुरू होने के बाद इस रूट पर वाहनों और यात्रियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होना तय है। ऐसे में यह नया 8-लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे न केवल दिल्ली से एयरपोर्ट के बीच यात्रा के समय (Travel Time) को आधा कर देगा, बल्कि कालिंदी कुंज, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और महामाया फ्लाईओवर पर लगने वाले भयंकर ट्रैफिक जाम से भी हमेशा के लिए मुक्ति दिलाएगा।
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