
वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सोमवार, 22 जून को अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलते ही कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है। इस उछाल के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बेहद कड़ा और आक्रामक बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान को सीधी सैन्य कार्रवाई (Military Action) की चेतावनी दी है। ट्रंप के इस रुख के बाद निवेशकों के बीच यह चिंता गहरे घाव की तरह बैठ गई है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही बेहद नाजुक दौर की शांति वार्ता खटाई में पड़ सकती है।
ब्रेंट क्रूड 2.2% उछला, डब्ल्यूटीआई भी $78 के पार
वैश्विक तनाव का सीधा और तात्कालिक असर तेल की कीमतों पर देखने को मिला है। सोमवार को कमोडिटी मार्केट खुलते ही बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 2.2 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 82.30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी तेजी से रिकवर करते हुए 78 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक निशान के ऊपर निकल गया है।
कमोडिटी फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, “कच्चे तेल की कीमतों में हाल ही में बड़ी गिरावट देखी गई थी और यह घटकर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था, लेकिन नई भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण बाजार का सेंटीमेंट अचानक बदल गया है और कीमतें अब $77-78 (WTI) की मजबूत रेंज में ट्रेड कर रही हैं।”
क्यों सुलग रहा है मिडिल ईस्ट? जानिए तेल की कीमतें बढ़ने की असल वजह
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस अचानक तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:
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डोनाल्ड ट्रंप की सीधी चेतावनी: फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर अपने हमले जारी रखे, तो अमेरिका सीधे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की किसी भी ईरानी कोशिश के बेहद गंभीर और विनाशकारी परिणाम होंगे।
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स्विट्जरलैंड वार्ता पर संकट के बादल: रविवार को कूटनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब ईरानी मीडिया ने दावा किया कि ट्रंप की धमकी के विरोध में तेहरान ने स्विट्जरलैंड में चल रही महावार्ता को बीच में ही रोक दिया है। हालांकि, बाद में बातचीत से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सूत्रों ने पुष्टि की कि दोनों पक्षों के बीच संवाद अभी भी जारी है, लेकिन इस अनिश्चितता ने बाजार को डरा दिया है।
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सीजफायर उल्लंघन के आरोप: ईरान ने इजरायल पर आरोप लगाया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में सीजफायर (युद्धविराम) की शर्तों का खुला उल्लंघन किया है। ईरान की तीखी बयानबाजी के बीच उसकी सैन्य कमान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया, हालांकि वीकेंड के दौरान इस रणनीतिक जलमार्ग से तेल की वैश्विक सप्लाई ज्यादातर बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलती रही।
बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मैराथन बैठक, 60 दिनों की समयसीमा शुरू
स्विट्जरलैंड के खूबसूरत बर्गेनस्टॉक (Burgenstock) रिजॉर्ट में चल रही यह हाई-लेवल कूटनीतिक बैठक दोनों देशों के बीच तय की गई 60 दिनों की समयसीमा का हिस्सा है। इसकी शुरुआत पिछले हफ्ते राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के बाद हुई थी।
ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के राजनयिकों के बीच यह बातचीत सोमवार सुबह तक लगातार चलती रही। इस महामंथन का मुख्य फोकस होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक नेविगेशन और कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखना और दक्षिणी लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जमीनी स्तर पर युद्धविराम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना है।
आगे क्या होगा? निवेशकों की टिक गईं कूटनीतिक हेडलाइंस पर नजरें
आपको बता दें कि पिछले कुछ हफ्तों में वैश्विक रिफाइनरियों द्वारा कच्चे तेल के वैकल्पिक रास्ते तलाशने के कारण कीमतों में थोड़ी नरमी जरूर आई थी, लेकिन ताजा विवाद ने बाजार को फिर से गर्म कर दिया है। एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में ग्लोबल मार्केट का सेंटीमेंट पूरी तरह से स्विट्जरलैंड से आने वाली कूटनीतिक खबरों पर निर्भर करेगा। अगर बातचीत में थोड़ी भी प्रगति होती है तो ऊर्जा बाजार तेजी से सामान्य हो जाएगा, लेकिन यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें एक नया रिकॉर्ड बना सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों पर पड़ेगा।
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