
हिंदू धर्म में वट (बरगद) के वृक्ष को बेहद पवित्र और पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशाल पेड़ में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का साक्षात वास होता है। पेड़ की शाखाओं में ब्रह्मा, मुख्य तने में भगवान विष्णु और इसकी गहरी जड़ों में महादेव शिव विराजते हैं। यही वजह है कि ज्येष्ठ मास में इस वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है, जो विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान देता है।
इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला ‘बड़ साते’ या ‘वट सप्तमी’ का व्रत आज यानी रविवार, 21 जून 2026 को पूरे देश में श्रद्धा के साथ रखा जा रहा है।
अधिक मास की वजह से हुआ भ्रम, जानिए क्यों खास है इस बार का व्रत
इस साल वट सप्तमी व्रत की सही तारीख को लेकर सुहागिन महिलाओं के बीच काफी असमंजस (कंफ्यूजन) की स्थिति बनी हुई थी। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस साल ज्येष्ठ माह के दौरान ‘अधिक मास’ (मलमल मास) लगा था, जिससे ज्येष्ठ महीने की अवधि सामान्य से अधिक लंबी हो गई। पंचांग के अनुसार, 15 जून को ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या समाप्त होने के बाद ही शुद्ध ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की शुरुआत हुई है। इसी वजह से शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी आज 21 जून को पड़ रही है, जो कि व्रत के लिए पूर्ण रूप से शास्त्रसम्मत और शुद्ध तारीख है।
वट सप्तमी पूजा के आज के शुभ मुहूर्त
आज के दिन वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने के लिए शास्त्रों में विशेष फलदायी मुहूर्त बताए गए हैं। सुहागिनें अपनी सुविधा के अनुसार इन शुभ समय में पूजा संपन्न कर सकती हैं:
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प्रातः काल (सुबह का) मुहूर्त: सुबह 05:30 बजे से लेकर 09:45 बजे तक (यह समय सुबह की मुख्य पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है)।
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अभिजीत मुहूर्त (दुपहर का श्रेष्ठ समय): सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक।
अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक है ‘बड़ साते’
सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से वट वृक्ष को दीर्घायु (लंबी उम्र), स्थिरता और सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि वट सप्तमी के दिन जो भी विवाहित महिला पूरी श्रद्धा से उपवास रखकर बरगद के पेड़ की उपासना करती है, उसके पति को लंबी आयु प्राप्त होती है और उसका वैवाहिक जीवन खुशियों से भर जाता है। इसके साथ ही यह पूजा घर-परिवार की कलह और आर्थिक परेशानियों को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
इस सरल विधि से करें वट वृक्ष की पूजा
वट सप्तमी की पूजा को पूरी विधि-विधान से करने पर ही इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। महिलाएं आज के दिन इस आसान पूजा विधि का पालन कर सकती हैं:
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सुबह जल्दी सोकर उठें, स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ या नए वस्त्र (संभव हो तो लाल या पीले रंग के) धारण करें।
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व्रत और पूजा का मन में संकल्प लेकर अपने घर के पास मौजूद किसी पवित्र वट वृक्ष (बरगद के पेड़) के पास जाएं।
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सबसे पहले तांबे के लोटे से पेड़ की जड़ में जल अर्पित कर उन्हें सींचें।
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इसके बाद वृक्ष को रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), फूल, भोग और धूप-दीपक दिखाकर पंचोपचार पूजा करें।
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अब हाथ में सूत का कच्चा धागा लेकर वट वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए परिक्रमा करें (परिक्रमा अपनी श्रद्धानुसार 7, 11 या 108 बार की जा सकती है)।
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परिक्रमा के दौरान मन ही मन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और महादेव का ध्यान करते रहें।
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पूजा संपन्न होने के बाद अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
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अंत में उपस्थित लोगों में प्रसाद वितरित करें और सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
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