
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इस समय एक बेहद गंभीर संकट की कगार पर खड़ी है। शहर की प्यास बुझाने वाले सात प्रमुख जलाशयों का वाटर लेवल तेजी से नीचे गिरा है, जिससे आने वाले दिनों में पानी की भारी किल्लत होने का खतरा मंडराने लगा है। अगर अगले कुछ दिनों में भारी बारिश नहीं हुई, तो मुंबईकरों को जुलाई की शुरुआत से ही पानी की भारी कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
खतरे के निशान के पास वाटर स्टॉक, बीएमसी की बढ़ी चिंता
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 20 जून की सुबह तक मुंबई को पानी सप्लाई करने वाली सात प्रमुख झीलों और तालाबों का कुल वॉटर स्टॉक घटकर सिर्फ 9% रह गया है। मानसून ने मुंबई में दस्तक तो दे दी है, लेकिन इसके जलग्रहण क्षेत्रों (कैचमेंट एरिया) में अब तक उतनी बारिश नहीं हुई है जो जलाशयों के स्तर को बढ़ा सके।
मुंबई की कुल जल भंडारण क्षमता 1,447,363 मिलियन लीटर है, जबकि वर्तमान में केवल 130,275 मिलियन लीटर पानी ही इस्तेमाल के लिए बचा है। बीएमसी अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जून के आखिरी हफ्ते में मानसून रफ्तार नहीं पकड़ता है, तो जुलाई के पहले हफ्ते से ही पूरे शहर में अतिरिक्त पानी कटौती लागू कर दी जाएगी।
खाली हो गईं मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली झीलें
मुंबई, ठाणे और नासिक जिलों में फैले ये सात जलाशय शहर की दैनिक जलापूर्ति का मुख्य जरिया हैं। इस समय कुछ सबसे बड़े जल स्रोतों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है:
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अपर वैतरणा: इस बड़े जलाशय की उपयोगी क्षमता 227,047 मिलियन लीटर है, लेकिन फिलहाल इसका ‘लाइव स्टॉक’ पूरी तरह खत्म हो चुका है और यह झील लगभग सूख चुकी है।
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तानसा: यहां सिर्फ 5,015 मिलियन लीटर पानी बचा है, जो इसकी कुल क्षमता का महज 3.46% है।
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भातसा: मुंबई को सबसे ज्यादा पानी देने वाले इस सबसे बड़े जलाशय (क्षमता 717,037 मिलियन लीटर) में सिर्फ 8.30% यानी 59,518 मिलियन लीटर पानी ही शेष है।
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मिडिल वैतरणा: यहाँ भी संकट गहराया हुआ है और यह अपनी क्षमता के सिर्फ 10.34% स्तर पर है।
छोटे जलाशयों की बात करें तो मोदक सागर में 25.18% और सबसे छोटी झील तुलसी में 22.28% पानी बचा है। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि ‘विहार’ झील अभी 41.44% भरी हुई है, लेकिन छोटे आकार के कारण यह पूरे शहर की जरूरत को लंबे समय तक पूरा नहीं कर सकती।
उमस के बीच येलो अलर्ट, मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर टिकीं नजरें
एक तरफ जहां पानी का संकट है, वहीं दूसरी तरफ मुंबईकर भीषण गर्मी और उमस से परेशान हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मुंबई के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है, जहां तापमान 29 डिग्री से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। आसमान में बादल छाए रहने के बावजूद कैचमेंट एरिया को भारी और लगातार होने वाली मानसूनी बारिश का इंतजार है।
राहत की बात यह है कि मौसम वैज्ञानिकों ने सोमवार से मानसूनी गतिविधियों के और ज्यादा सक्रिय होने की उम्मीद जताई है। अनुमान है कि 22 जून से मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में बारिश की रफ्तार तेज होगी।
क्या आने वाले दिनों में मिलेगी इस संकट से राहत?
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में दोपहर और शाम के समय बिजली कड़कने के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और अच्छी बौछारें पड़ने की संभावना है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है और झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश होती है, तो जलस्तर में सुधार देखने को मिलेगा। पानी की आवक बढ़ने के बाद ही बीएमसी पानी की पाबंदियों को लेकर कोई ढील देने पर विचार करेगी, अन्यथा मुंबई वासियों को आने वाले हफ्तों में पानी संभालकर खर्च करना होगा।
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