
उत्तराखंड में अब कथित “नौकरी जिहाद” का मामला सामने आया है। अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर राज्य में 28 साल पुरानी नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
28 फरवरी 1996 में खत्म हुए उर्दू अनुवादक-कनिष्ठ लिपिक के पद: नेगी
विकेश सिंह नेगी का आरोप है कि कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 1994-95 में सृजित अस्थायी/अधिसंख्य (Supernumerary) उर्दू अनुवादक-कनिष्ठ लिपिक पदों की अवधि 28 फरवरी 1996 को समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद कई विभागों में संबंधित कर्मचारी गैरकानूनी तरीके से आज भी कार्यरत हैं। जबकि उत्तराखंड में सैंकड़ों प्रशिक्षित बेरोजगार युवा हैं। जिनकी इन पदों पर चयन हो सकती थी।
पूर्व के मुख्यमंत्रियों से भी शिकायत कर चूका हूं: नेगी
विकेश सिंह नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूर्व के मुख्यमंत्रियों से भी उन्होनें इस मामले की शिकायत की लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उम्मीदें हैं कि वह नौकरी जिहाद के मुद्दे पर कड़ा एक्शन लेंगें।
नौकरी खत्म होने के बाद भी नौकरी पर बरकरार हैं कर्मचारी
विकेश नेगी ने कहा कि नौकरी खत्म होने के बाद भी उच्चाधिकारियों से सेंटिंग गेटिंग के आधार पर सभी कर्मचारी प्रमोशन लेते रहे और आज भी नौकरी पर बरकरार हैं। विकेश नेगी ने कहा कि पूर्व में भी वह कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन मामले को दबा दिया गया और सरकार व विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई। नेगी ने मुख्यमंत्री धामी से इस मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
विकेश नेगी ने मुख्यमंत्री से की तीन प्रमुख मांगें
- वर्तमान में कार्यरत सभी संबंधित उर्दू अनुवादक एवं कर्मचारियों की नियुक्तियों और सेवा अभिलेखों की उच्चस्तरीय जांच की मांगें।
- शासनादेश के अनुरूप पदों की वैधता और सेवा निरंतरता की समीक्षा।
- वित्तीय अनियमितता या नियम विरुद्ध नियुक्ति सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हो कठोर कार्रवाई।
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