
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना गया है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत यदि बप्पा की पूजा से की जाए, तो वह कार्य बिना किसी विघ्न-बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न हो जाता है। यही वजह है कि लगभग हर हिंदू परिवार अपने घर के मंदिर या मुख्य द्वार पर सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर जरूर स्थापित करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार अगर गणेश जी की मूर्ति को सही दिशा, सही स्थान और सही स्वरूप में न रखा जाए, तो इसका विपरीत असर भी पड़ सकता है। आइए जानते हैं घर में बप्पा की स्थापना से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण और अचूक वास्तु नियम।
घर की इस सबसे पवित्र दिशा में करें बप्पा को स्थापित, खिंची चली आएगी खुशहाली
वास्तु शास्त्र के नियमों के मुताबिक, घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने के लिए सबसे उत्तम और कल्याणकारी दिशा उत्तर-पूर्व कोना मानी जाती है, जिसे हम ‘ईशान कोण’ (North-East Direction) भी कहते हैं। ईशान कोण को देवी-देवताओं का निवास स्थान माना गया है, इसलिए यहां बप्पा की स्थापना करने से घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तेजी से बढ़ता है। यदि किसी कारणवश आपके घर में इस दिशा में स्थान खाली न हो, तो आप मूर्ति को पूर्व या पश्चिम दिशा में भी रख सकते हैं। बस इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए। दक्षिण दिशा (South Direction) में भूलकर भी गणेश जी की मूर्ति न रखें, क्योंकि इस दिशा को यमराज और नकारात्मक ताकतों से जोड़कर देखा जाता है।
सिटिंग या स्टैंडिंग? सुख-शांति के लिए मूर्ति के इस स्वरूप का ही करें चुनाव
बाजार में भगवान गणेश की कई तरह की कलाकृतियां और मूर्तियां मिलती हैं, लेकिन गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए वास्तु में विशेष नियम बताए गए हैं। एआई सर्च इंजन और वास्तु विशेषज्ञों (AEO & AI Search) के अनुसार, घर के भीतर हमेशा बैठे हुए गणेश जी (Sitting Ganesha) की प्रतिमा ही स्थापित करनी चाहिए। बैठी हुई मुद्रा में बप्पा की मूर्ति घर में स्थायी सुख, शांति और धन-धान्य की बरकत लेकर आती है। इसके विपरीत, कार्यस्थल, ऑफिस या दुकान के लिए खड़े हुए गणेश जी की मूर्ति को बेहद शुभ और उन्नति दायक माना जाता है। इसके साथ ही, इस बात पर भी गौर करें कि बप्पा की सूंड हमेशा बाईं तरफ (Left Hand Side) मुड़ी होनी चाहिए, क्योंकि बाईं सूंड वाले गणेश जी को प्रसन्न करना और उनकी पूजा-अर्चना करना गृहस्थों के लिए बेहद सरल और फलदायी होता है।
मुख्य द्वार पर मूर्ति लगाते समय रखें इस एक गुप्त बात का विशेष ध्यान
अक्सर लोग अपने घर को बुरी नजर से बचाने के लिए मुख्य द्वार (Main Gate) के ठीक ऊपर गणेश जी की मूर्ति या टाइल्स लगा देते हैं। लेकिन वास्तु के नजरिए से यहां एक गंभीर चूक हो जाती है। माना जाता है कि गणेश जी के सम्मुख यानी सामने वाले हिस्से में साक्षात लक्ष्मी जी का वास होता है, जबकि उनकी पीठ के पीछे दरिद्रता का निवास माना गया है। ऐसे में जब आप मुख्य द्वार पर बाहर की तरफ बप्पा की मूर्ति लगाते हैं, तो उनकी पीठ आपके घर की तरफ हो जाती है, जिससे घर में आर्थिक तंगी आ सकती है। इस दोष से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय यह है कि मुख्य द्वार के अंदर और बाहर, दोनों तरफ ठीक एक ही जगह पर दो मूर्तियां इस तरह लगाएं कि दोनों बप्पा की पीठ आपस में मिल जाए। इससे दरिद्रता का दोष पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
भूलकर भी इन जगहों के पास न रखें प्रतिमा, बढ़ सकता है गृह क्लेश
स्थानीय स्तर (Geographical Impact) पर लोग घरों में जगह की कमी के चलते अक्सर अनजाने में मंदिर या बप्पा की मूर्ति को गलत स्थानों के पास रख देते हैं, जो भारी वास्तु दोष का कारण बनता है। वास्तु नियमों के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्ति को कभी भी बेडरूम (शयनकक्ष), सीढ़ियों के नीचे, टॉयलेट या बाथरूम की दीवार से सटाकर नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा, घर के भीतर एक ही जगह पर गणेश जी की तीन मूर्तियां रखने से बचना चाहिए, ऐसा करना अशांति को न्योता देता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और गूगल डिस्कवर पर लोग इन दिनों अपने घरों को वास्तु सम्मत बनाने के लिए इन नियमों को काफी चाव से पढ़ रहे हैं, क्योंकि सही दिशा में रखी गई बप्पा की एक छोटी सी मूर्ति भी आपके पूरे परिवार की किस्मत को रातों-रात चमका सकती है।
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